मजदूरी बढ़ाने व स्थायी नियुक्ति की मांग पर स्वच्छता कर्मियों की हड़ताल, नगर निगम कार्यालय में जड़ा ताला

सीतामढ़ी नगर निगम के स्वच्छता कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पूर्णतः हड़ताल पर हैं. आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा आर्थिक शोषण और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कामकाज ठप कर दिया है. इस हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है.

स्वच्छता कर्मियों के राज्यस्तरीय महासंघ के आह्वान पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को सीतामढ़ी नगर निगम के सभी स्वच्छता कर्मी पूर्णतः हड़ताल पर रहे. इस दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष स्वच्छता कर्मी नगर निगम परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने सारा कामकाज ठप कराते हुए मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी व प्रदर्शन किया.

आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर आर्थिक शोषण और दुर्व्यवहार का आरोप

प्रदर्शनकारी स्वच्छता कर्मियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनका आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है. उन्हें लगातार दो-तीन महीने तक मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है. आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से काम तो कराया जा रहा है, लेकिन एजेंसियां न तो समय पर मानदेय देती हैं और न ही निर्धारित राशि का भुगतान करती हैं.कर्मियों का कहना है कि 9 हजार रुपये मजदूरी तय होने के बावजूद विभिन्न बहानों से हाजिरी काट ली जाती है और हाथ में सिर्फ 7 से 8 हजार रुपये ही आते हैं. शहर को स्वच्छ रखने वाले कर्मियों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि समय पर पैसा न मिलने से उनके बच्चों की पढ़ाई, इलाज और परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है. विरोध करने पर एजेंसी के कर्मी धमकियां देते हैं.

शहर में सफाई व्यवस्था चरमराने की आशंका, नगर आयुक्त का बयान

हड़ताल के कारण पूरे सीतामढ़ी शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका बन गई है. कई वार्डों में पहले से ही सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं थी, ऐसे में अब सड़कों पर गंदगी का अंबार लगने की संभावना जताई जा रही है.मामले पर नगर आयुक्त डॉ. गजेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि यह हड़ताल राज्यस्तरीय महासंघ के आह्वान पर की गई है. कर्मियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला बंद कर कामकाज बाधित किया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से प्राप्त दिशानिर्देशों के अनुरूप आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.ई की जाएगी.


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लेखक के बारे में

By रतिकांत झा

रतिकांत पिछले करीब 17 वर्षों से पत्रकारिता में निरंतर कार्यरत हैं. उन्हें राजनीति, धर्म-अध्यात्म, पर्व-त्योहार, अपराध, सामाजिक सरोकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं जैसे बहुआयामी विषयों पर लगातार सटीक रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव प्राप्त है.

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