पुपरी सहयोग शिविर: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजना के तहत आयोजित 'सहयोग शिविर' की कार्यप्रणाली पर पुपरी प्रखंड की भिट्ठा धर्मपुर पंचायत से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रणजीत कुमार ने जिलाधिकारी को एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजकर शिविर में फैली अव्यवस्था, प्रशासनिक उदासीनता और महज कागजी खानापूर्ति की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी पहल जमीनी स्तर पर महज औपचारिकता बनकर सिमट गई है.
तीन डिसमिल जमीन का झांसा देकर जुटाई गई भीड़
शिविर के संचालन में पंचायत कर्मियों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- भ्रामक सूचना से परेशानी: पंचायत कर्मियों द्वारा गांव-टोले की गरीब एवं अनपढ़ महिलाओं को तीन-तीन डिसमिल वासगीत भूमि मिलने की झूठी बात कहकर शिविर में बुला लिया गया.
- आर्थिक नुकसान व परेशानी: सैकड़ों गरीब महिलाएं चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में साइबर कैफे व कंप्यूटर दुकानों पर पैसे खर्च कर आवेदन बनवाकर शिविर में पहुंचीं.
- मूल समस्याएं दरकिनार: जमीन के आवेदनों के अंबार के आगे ग्रामीणों की वास्तविक जनसमस्याएं पूरी तरह से दब गईं और शिविर केवल आवेदन जमा करने का केंद्र बनकर रह गया.
अधिकारियों की अनुपस्थिति और जनता का आक्रोश
शिविर में प्रशासनिक तालमेल की भारी कमी देखने को मिली, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा:
- सीओ को लौटना पड़ा: अंचल कार्यालय से जुड़े दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे लंबित मामलों को लेकर स्थानीय लोगों ने जमकर रोष जताया, जिसके चलते सीओ को उल्टे पांव वापस जाना पड़ा. बीडीओ से भी लोगों ने नाराजगी जताई.
- नोडल अधिकारी नदारद: जिला प्रशासन द्वारा निगरानी हेतु नियुक्त किसी भी नोडल अधिकारी के शिविर में उपस्थित न होने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई.
रणजीत कुमार ने डीएम से आग्रह किया है कि शिविरों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर नोडल अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति तय की जाए.
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