Monsoon rainfall: इस वर्ष मानसून सीजन के दौरान बारिश में हुई भारी कमी ने जिले के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के हवाले से जिला कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ राम ईश्वर प्रसाद से मिली जानकारी के अनुसार, अगस्त के अंतिम सप्ताह तक जिले में वर्षा में भारी गिरावट दर्ज की गई. इसके कारण सीतामढ़ी के कई क्षेत्रों में सुखाड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगी थी, जिसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव धान की खेती पर पड़ा है.
Bihar Agriculture News: रोपनी में देरी और सिंचाई पर बढ़ा भारी खर्च
जून और जुलाई के महत्वपूर्ण महीनों में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी की भारी कमी बनी रही. पानी के आभाव में कई किसानों को धान की रोपनी काफी देर से करनी पड़ी, जबकि कुछ इलाकों में रोपनी का कार्य पूरी तरह प्रभावित हुआ. अपनी फसल को बचाने के लिए किसानों को मजबूरन निजी बोरिंग, डीजल पंप और महंगे सिंचाई साधनों का सहारा लेना पड़ा, जिससे खेती की कुल लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.
Paddy Crop: अगस्त के अंत में हुई बारिश से फसल को मिला नया जीवन
राहत की बात यह रही कि अगस्त के अंतिम सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र तथा नेपाल के तराई एवं जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई. इसका सकारात्मक असर सीतामढ़ी जिले में भी देखने को मिला. जिले के परिहार, चोरौत और सुप्पी समेत कई प्रखंडों में अच्छी वर्षा होने से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंच गई है, जिससे सूख रही धान की फसल को नया जीवन मिला है और पौधों की बढ़वार में सुधार देखा जा रहा है.
अभी भी सामान्य से काफी पीछे है जिले की वर्षा का स्तर
कृषि वैज्ञानिक डॉ राम ईश्वर प्रसाद के अनुसार, हालिया बारिश से भले ही तात्कालिक स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन जिले में कुल संचयी वर्षा अब भी सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है. ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में होने वाली मानसूनी बारिश धान की अंतिम उपज और जिले के किसानों की उम्मीदों के लिए सबसे ज्यादा निर्णायक साबित होने वाली है.
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