Sitamarhi News: सुप्पी प्रखंड के मनियारी, ससौला, घरवारा, मोहनी मंडल, कोठिया समेत विभिन्न गांवों में मधुश्रावणी पर्व पूरे श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है. मंगलवार को 15 दिवसीय मधुश्रावणी अनुष्ठान के तीसरे दिन नवविवाहिताओं ने नाग देवता, कछुआ तथा पूर्व संध्या में लाए गए फूल-पत्तियों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि, दांपत्य जीवन की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना की गई.
Suppi News: नाग देवता को अर्पित किया दूध और लावा
अनुष्ठान के तीसरे दिन नवविवाहिताओं ने पारंपरिक विधि से नाग देवता और कछुआ की पूजा की. पूजा के दौरान दूध, लावा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर पति की दीर्घायु, परिवार की समृद्धि और सुख-शांति की प्रार्थना की गई. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मधुश्रावणी पर्व वैवाहिक जीवन की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है.
पारंपरिक नियमों का कर रही हैं पालन
मधुश्रावणी पर्व के दौरान नवविवाहिताएं सभी धार्मिक नियमों का पालन कर रही हैं. परंपरा के अनुसार इस अनुष्ठान में ससुराल के अन्न, फल, दूध एवं अन्य पूजन सामग्रियों का ही उपयोग किया जाता है. प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक कथाओं का श्रवण कराया जाता है और निर्धारित विधि से पूजा संपन्न कराई जाती है.
गांवों में दिख रहा उत्साह का माहौल
प्रखंड के विभिन्न गांवों में मधुश्रावणी पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है. नवविवाहिताएं पारंपरिक परिधान धारण कर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में भाग ले रही हैं. महिलाएं लोकगीत गाते हुए धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न करा रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना हुआ है.
मिथिला की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है मधुश्रावणी
महिलाओं ने बताया कि मिथिला की यह प्राचीन परंपरा वैवाहिक जीवन की सुख-शांति, परिवार की समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना से जुड़ी है. पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ निभाया जा रहा है.
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