बारिश नहीं, नलकूप भी बंद... रीगा के किसानों पर दोहरी मार, खेती बचाने के लिए बढ़ा खर्च

रीगा प्रखंड के किसान भीषण सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं. जहां बारिश की कमी है, वहीं अधिकांश राजकीय नलकूप भी बंद पड़े हैं. इससे धान की रोपनी प्रभावित हो रही है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

Sitamarhi News: आकाश में बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं होने और अधिकांश राजकीय नलकूपों के बंद रहने से रीगा प्रखंड के किसान गंभीर सिंचाई संकट का सामना कर रहे हैं. धान की रोपनी के मौसम में किसान निजी पंपसेट और महंगे डीजल के भरोसे खेती करने को मजबूर हैं.

किसानों का कहना है कि समय पर सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने से खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है.

पांच दर्जन नलकूप, लेकिन चालू सिर्फ चार-पांच

किसानों के अनुसार, प्रखंड क्षेत्र में करीब पांच दर्जन राजकीय नलकूप हैं, लेकिन इनमें से महज चार या पांच नलकूप ही चालू हैं.

जो नलकूप चल भी रहे हैं, उनके नाले कई जगह टूटे और ध्वस्त पड़े हैं. ऐसे में पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है. नतीजतन, नलकूप के आसपास के किसान भी निजी पंपसेट का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं.

महंगा डीजल और उर्वरक बढ़ा रहे खेती की लागत

धान की रोपनी के लिए किसानों को ऊंचे दाम पर डीजल खरीदना पड़ रहा है.

इसके साथ ही खेती के मौसम में उर्वरकों के दाम भी बढ़ जाते हैं और कई बार बाजार में उनकी कमी हो जाती है. इससे किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है.

कई बार उठ चुकी है मांग, लेकिन समाधान नहीं

स्थानीय किसानों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों, विधायक और सांसद के समक्ष कई बार बंद पड़े राजकीय नलकूपों को चालू कराने की मांग रखी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई.

किसान पारसनाथ सिंह, राम जन्म गिरी, नागेंद्र बैठा, कौशल किशोर सिंह और मोहन राम सहित अन्य लोगों का कहना है कि यदि सभी सरकारी नलकूप चालू रहते तो सिंचाई की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाती और खेती की लागत भी कम होती.

किसानों ने प्रशासन से की मांग

किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से शीघ्र बंद पड़े राजकीय नलकूपों की मरम्मत कर उन्हें चालू कराने की मांग की है.

उनका कहना है कि धान की रोपनी के इस महत्वपूर्ण समय में सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने से किसानों को राहत मिलेगी और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

फणींद्र विगत 16 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें समस्यात्मक, प्रशासनिक एवं जमीनी स्तर की प्रखंड से जुड़ी खबरों को बारीकी से तराशने का गहरा अनुभव प्राप्त है. वे स्थानीय मुद्दों को निष्पक्षता से उठाने के लिए जाने जाते हैं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >