18 साल में आठ भ्रष्ट लोकसेवक निगरानी के शिकंजे में
वर्ष 2008 से 5 जनवरी 2026 तक आधा दर्जन से अधिक भ्रष्टाचार मामलों के आधार पर शिवहर जिले के आठ भ्रष्ट लोकसेवकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है.
शिवहर: जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कई बड़ी कार्रवाई की है. जिसमें वर्ष 2008 से 5 जनवरी 2026 तक आधा दर्जन से अधिक भ्रष्टाचार मामलों के आधार पर शिवहर जिले के आठ भ्रष्ट लोकसेवकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है. बावजूद इसके शिवहर जिले में अभी भी कई ऐसे सरकारी कर्मचारी और अधिकारी हैं, जो रिश्वतखोरी जैसी अपनी गलत आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं. लगातार विभाग को भी और सख्त कार्रवाई करनी पड़ रही है और जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. जिससे कई अधिकारी रंगे हाथों पकड़े भी जा रहे हैं. इससे सरकारी दफ्तरों में डर का भी माहौल बना है. हालांकि इस बड़े भ्रष्टाचार के खेल में स्थानीय लोग अपनी शिकायतें वरीय अधिकारियों के पास भी दर्ज करा रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसे साहेब और उनके कर्मचारी की प्रवृत्ति अभी भी नहीं बदल रही है. वहीं वर्ष 2008 में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने प्रथम कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन डॉ. पंचानंद प्रसाद को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद दूसरी कार्रवाई निगरानी विभाग की टीम ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा शिवहर के सहायक मैनेजर अर्जुन राम को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया. जबकि तीसरी कार्रवाई वर्ष 2015 में निगरानी विभाग की टीम ने तरियानी थानाध्यक्ष संजय कुमार राय को 15 हजार रुपये दर्ज प्राथमिकी में से नाम हटाने के एवज में रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था. साथ ही निगरानी विभाग की टीम ने चौथी कार्रवाई के दौरान जिला कोषागार विभाग के सहायक क्लर्क राम प्रवेश चौधरी को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था. तथा वर्ष 2018 के 23 फरवरी को निगरानी विभाग की टीम ने पांचवीं कार्रवाई के तहत जिले के भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता अमरेंद्र कुमार और जूनियर इंजीनियर विद्यासागर को 88 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था. जबकि छठी कार्रवाई के दौरान निगरानी विभाग की टीम ने वर्ष 2020 के 21 जनवरी को शिवहर जिले के तरियानी अंचल कार्यालय में कार्यरत राजस्व कर्मचारी सह प्रभारी अंचल निरीक्षक ईश्वर चंद्र सिंह को 9 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था. साथ ही सातवीं कार्रवाई के रूप में वर्ष 2025 के 18 जून को निगरानी विभाग की टीम ने समाहरणालय स्थित जिला भू-अर्जन कार्यालय के लिपिक विजय कुमार श्रीवास्तव को रेलवे द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजा राशि दिलाने के एवज में 70 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. तथा आठवीं कार्रवाई के रूप में निगरानी विभाग की टीम ने 5 जनवरी 2026 को पुरनहिया अंचल के राजस्व कर्मचारी रामकृत महतो को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई काशोपुर निवासी विनोद राय चंद्रवंशी की लिखित शिकायत के आधार पर की गई है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राजस्व कर्मचारी ने उसकी जमीन की जमाबंदी का नामांतरण करने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी.
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