बदहाली. सेंट्रल टीम ने किया था निरीक्षण, व्यवस्था में सुधार के आदेश के बाद भी समस्या जस की तस
सीतामढ़ी : व्यवस्था में सुधार के दावों के विपरित सीतामढ़ी सदर अस्पताल की बदहाली लगातार बढ़ती जा रहीं है. हैरत की बात यह की सेंट्रल टीम के सदर अस्पताल का निरीक्षण करने व व्यवस्था में सुधार के आदेश देने के बावजूद तस्वीर जस की तस है. यूं तो सुदूर ग्रामीण इलाकों से लोग बड़ी उम्मीद के साथ सदर अस्पताल पहुंचते है, लेकिन सदर अस्पताल प्रशासन मरीजों की उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतर रहा है.
संसाधन व दवाओं के अभाव के चलते मरीज दुआओं के सहारे रह गये है.
चिकित्सक व कर्मियों की लेट लतीफी भी बरकरार है. बताते चले की 28 अप्रैल को सांसद राम कुमार शर्मा ने सदर अस्पताल का निरीक्षण कर व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी उजागर की थी. सांसद ने मामले को संसद में उठाया था. इसके आलोक में दिल्ली से पहुंची सेंट्रल टीम ने भी सदर अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार का आदेश दिया था. बावजूद इसके सदर अस्पताल की व्यवस्था में बदलाव नहीं आ सका है.
खुले बाजार से खरीदते हैं दवाएं : वैसे तो सदर अस्पताल में लोग इलाज के लिए आते है. जहां चिकित्सक मरीज की सेहत की जांच करते है और कर्मी आवश्यक दवा देते है. लेकिन वर्तमान में सदर अस्पताल में किसी भी दर्द का मर्ज नहीं है. चिकित्सक व कर्मियों की मनमानी है. दवाओं का अभाव है. डिस्पोजेबुल सीरिंज तक मरीजों को खुले बाजार से खरीदनी पड़ रहीं है. जाहिर है कि यहां इलाज को आये मरीजों को न तो दवा मिल रहीं है और नहीं हीं उनका इलाज हो पा रहा है. ऐसे में बस दुआ के सहारे रह गये है मरीज.
मौसम के तेवर में बदलाव के साथ इलाके में रोगों का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है. लिहाजा अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ रहीं है. सोमवार को सदर अस्पताल में रोगियों की भारी भीड़ रहीं. हालत यह की घंटों मरीज खास कर महिलाएं कतार में लगी रहीं. कड़ी धूप में पुर्जा कटवाने के लिए कतार में लगी महिलाएं परेशान दिखी. बताते चले की सदर अस्पताल में महिला व पुरुष के लिए एक-एक काउंटर हीं है.
मरीजों की भीड़ के कारण महिलाएं एक बजे तक पुर्जा कटवाती है और जब डॉक्टर से दिखाने का वक्त होता है तो ओपीडी सेवा बंद हो जाती है. लिहाजा मरीजों को बगैर इलाज लौटना पड़ता है. सोमवार को सदर अस्पताल में कुछ ऐसी हीं तस्वीर दिखी.
दवाओं की कमी, दुआओं के सहारे जी रहे मरीज, चिकित्सकों व कर्मियों की लापरवाही व लेटलतीफी से मरीज परेशान
सीतामढ़ी : सिविल सर्जन के आदेश दर आदेश व कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद सदर अस्पताल के कर्मी व चिकित्सकों की कार्यशैली में बदलाव नहीं आ सका है. यहीं वजह है कि सदर अस्पताल में ड्रेस कोड का पालन नहीं हो पा रहा है.
चिकित्सक व कर्मियों के बगैर यूनिफॉर्म के अस्पताल में ड्यूटी करने का फायदा बिचौलिये उठा रहे है. बताते चले की सीएस के आदेश के आलोक में स्वास्थ्य प्रबंधक व अस्पताल उपाधीक्षक द्वारा सभी कर्मियों व चिकित्सकों को ड्रेस कोड के पालन का आदेश दिया गया था. चिकित्सक व कर्मियों को यूनिफॉर्म में ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया था. लेकिन कर्मियों ने निर्देश का पालन नहीं किया.
मार्च माह में स्वास्थ्य प्रबंधक विजय चंद्र झा ने पत्र भेज कर हर हाल में ड्रेस कोड का पालन करने अन्यथा कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी. इसी बीच सीतामढ़ी पहुंची सेंट्रल टीम के अधिकारी डॉ हिमांशु भूषण ने सदर अस्पताल के निरीक्षण के दौरान कर्मियों के बगैर यूनिफॉर्म ड्यूटी करने पर सवाल उठाया था. साथ हीं अविलंब ड्रेस कोड का पालन कराने का आदेश दिया था. बावजूद इसके सदर अस्पताल में ड्रेस कोड का पालन नहीं हो सका है. कर्मी अब भी सामान्य लिवास में ड्यूटी कर रहे है.
अस्पताल में बढ़ी बिचौलियों की सक्रियता : सदर अस्पताल में बिचौलिये सक्रिय है, जो अस्पताल में इलाज को पहुंचे गरीबों को फांस कर निजी क्लिनिक में ले जाते है. जहां मरीजों का आर्थिक दोहन किया जाता है. जबकि मरीज को पहुंचाने के लिए बिचौलिये को कमीशन दिया जाता है. शहर स्थित कई निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम बिचौलियों के सहारे चल रहे है. सदर अस्पताल में इलाज को पहुंचे मरीजों को बिचौलियों से बचाने के लिए ड्रेसकोड की व्यवस्था दी गयी है. लेकिन अधिकारियों के आदेश का पालन नहीं हो रहा है. वहीं इसका फायदा बिचौलिये उठा रहे है.
