40 में महज 14 डॉक्टरों ने ही सौंपा अपना प्रमाणपत्र

मनमानी. मेजरगंज के 24 चिकित्सकों ने नहीं दिया जवाब इलाके में फरजी चिकित्सकों के हौसले बुलंद मेजरगंज : प्रखंड के 40 में से 14 चिकित्सकों ने ही स्वास्थ्य विभाग को अपना प्रमाण पत्र सौंपा है. जिन 14 चिकित्सकों ने अपने प्रमाण पत्र सौंपे है, उनमें अधिकांश आरएमपी, आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथिक चिकित्सा से संबंधित है. […]

मनमानी. मेजरगंज के 24 चिकित्सकों ने नहीं दिया जवाब

इलाके में फरजी चिकित्सकों के हौसले बुलंद
मेजरगंज : प्रखंड के 40 में से 14 चिकित्सकों ने ही स्वास्थ्य विभाग को अपना प्रमाण पत्र सौंपा है. जिन 14 चिकित्सकों ने अपने प्रमाण पत्र सौंपे है, उनमें अधिकांश आरएमपी, आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथिक चिकित्सा से संबंधित है.
शेष 24 चिकित्सकों ने न तो अपना प्रमाण पत्र सौंपा है और नहीं रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ केके झा द्वारा जारी नोटिस का जवाब हीं दिया है. इतना हीं नहीं बुलंद हौसलों के साथ फरजी चिकित्सक अपना क्लिनिक व नर्सिंग होम भी चला रहे है.
बताते चले की स्वास्थ्य विभाग के सचिव व सिविल सर्जन के निर्देश के आलोक में रेफरल अस्पताल प्रभारी डॉ केके झा द्वारा 40
चिकित्सकों को नोटिस जारी कर क्लिनिक व नर्सिंग होम चलाने के कागजात के अलावा चिकित्सकों से चिकित्सकीय प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद अब तक 14 चिकित्सकों ने ही प्रमाण पत्र की छायाप्रति जमा करायी है. पहले नोटिस के बाद हालांकि इलाके में हड़कंप मचा रहा. कुछ चिकित्सकों ने क्लिनिक बंद कर लिया तो कुछ ने अपने बोर्ड उतार लिए. लेकिन एक सप्ताह बाद भी बोर्ड टंग गये और क्लिनिक भी चलने लगे हैं. नोटिस जारी करने की लंबी प्रक्रिया की भनक अब तक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तक नहीं पहुंची है क्या? यह अब प्रबुद्ध वर्ग में चर्चा का विषय बन गया है.
स्थानीय लोगों की माने तो स्वास्थ्य विभाग व फरजी चिकित्सकों के बीच अंदरूनी समझौता हो गया है, लिहाजा फिर से इलाज के नाम अवैध व्यापार शुरू हो गया है. इतना हीं नहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक नोटिस से आगे की कार्रवाई नहीं करने को लेकर भी सवाल उठ रहे है.
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ झा ने बताया कि पोलियो अभियान के समापन के बाद निर्धारित समय पर अपना योग्यता प्रमाण पत्र, नर्सिंग होम के कागजात नहीं जमा कराने वालों अथवा गलत प्रमाण पत्र जमा करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई शुरू होगी. इसके तहत क्लिनिक व नर्सिंग होम सील कर दोषी चिकित्सक व क्लिनिक संचालकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जायेगी.

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