जालसाजी मामले में दारोगा व अधिवक्ता समेत तीन गिरफ्तार

सीतामढ़ी/रून्नीसैदपुर / पुलिस की स्पेशल टीम ने छापेमारी कर दारोगा रामचंद्र प्रसाद, अधिवक्ता मधुशंकर सिंह व अधिवक्ता लिपिक नागेंद्र राय को गिरफ्तार कर लिया. रविवार को न्यायिक हिरासत में पेश करने के बाद तीन को जेल भेज दिया गया. तीनों ने जालसाजी कर एक शातिर अपराधी को नाम बदल कर जमानत दिलाने का प्रयास किया […]

सीतामढ़ी/रून्नीसैदपुर / पुलिस की स्पेशल टीम ने छापेमारी कर दारोगा रामचंद्र प्रसाद, अधिवक्ता मधुशंकर सिंह व अधिवक्ता लिपिक नागेंद्र राय को गिरफ्तार कर लिया. रविवार को न्यायिक हिरासत में पेश करने के बाद तीन को जेल भेज दिया गया. तीनों ने जालसाजी कर एक शातिर अपराधी को नाम बदल कर जमानत दिलाने का प्रयास किया था.

अधिवक्ता व अधिवक्ता लिपिक ने एक ही व्यक्ति का अलग-अलग नाम से शपथ पत्र बनाया था.
अनुसंधानक दारोगा ने गवाही नहीं देने के लिए साक्षियों पर दबाव डाला था. इस मामले में एसपी हरि प्रसाथ
जालसाजी मामले में
एस ने पुलिस की विशेष टीम गठित की थी.
दारोगा व अधिवक्ता की गिरफ्तारी को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म
जालसाजी मामले में
हो गया है. खासतौर पर दारोगा को गिरफ्तार कर जिला पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि कानून के लिए सब बराबर है. एसपी हरि प्रसाथ एस ने बताया कि मामले में आरोपित रणधीर राय को पूर्व में ही रिमांड किया जा चुका है. एक आरोपित के नाम का सत्यापन नहीं हो रहा है.
क्या है पूरा मामला
रून्नीसैदपुर पुलिस ने 10 दिसंबर, 2013 को रून्नीसैदपुर में छापेमारी कर आर्म्स के साथ मुजफ्फरपुर जिले के चार बदमाशों को गिरफ्तार किया था. मामले को लेकर रून्नीसैदपुर थाने में कांड दर्ज कराया गया था. इसमें मुजफ्फरपुर के औराई थाना के विशनपुर निवासी वीरेंद्र सहनी व हरेंद्र सहनी, राम खेतारी निवासी दिलीप कुमार व परसामा निवासी जितेंद्र कुमार को आरोपित किया गया था. मामले की जांच का जिम्मा अवर निरीक्षक रामचंद्र प्रसाद को मिला था. मामले की कोर्ट में सुनवाई जारी थी. इसी बीच आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन मामलों में जेल में बंद बथनाहा थाने के मदनपट्टी निवासी रणधीर राय ने सीजेएम कोर्ट में अपने वास्तविक नाम रणधीर राय के नाम से जमानत की अर्जी दी. अधिवक्ता लिपिक नागेंद्र राय की पहचान पर अधिवक्ता मधु शंकर सिंह ने शपथ पत्र दायर किया था.
जिसे सीजेएम ने रिजेक्ट कर दिया था. इसके बाद रणधीर राय ने कांड संख्या 496/2013 के तहत हरेंद्र सहनी के नाम पर जमानत के लिए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम के कोर्ट में अर्जी दी. वहीं पटना हाइकोर्ट में भी 31 मार्च 2015 को हरेंद्र सहनी के नाम जमानत की अर्जी दायर की गयी. इस बार भी अधिवक्ता मधु शंकर सिंह व अधिवक्ता लिपिक नागेंद्र राय ने उसका शपथ पत्र तैयार किया.
पटना हाइकोर्ट में जमानत की अर्जी पर सुनवाई के दौरान शक होने के बाद न्यायाधीश ने 7 सितंबर, 2016 को सीआइडी के एडीजी को व्यक्तिगत स्तर पर मामले की जांच का आदेश दिया. जांच में पाया गया कि रणधीर राय ने हरेंद्र सहनी के नाम से कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर जालसाजी व षड्यंत्र रच कर जमानत लेने की कोशिश की. जमानत के अलग-अलग आवेदनों, शपथ पत्रों, वकालतनामा, जेल से अग्रसारित पहचान पत्र व अन्य कागजात की बिंदुवार जांच में एडीजी सीआइडी ने पाया कि रणधीर ने खुद को हरेंद्र सहनी बता जमानत लेकर जेल से निकलने की कोशिश की. वजह रणधीर राय के नाम बथनाहा थाने में आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन मामले दर्ज हैं. आपराधिक षडयंत्र रच कर कोर्ट व पुलिस को धोखा देने के लिए जेल से छूटने व जमानत लेने के लिए रणधीर राय ने दो-दो बार अलग-अलग नाम से कोर्ट में जमानत की अर्जी दायर किया. जेल से निर्गत दोनों ही बार अलग अलग नाम से वकालतनामा प्राप्त करने में उसे जेल कर्मियों ने भी सहयोग किया था.
एडीजी ने जांच रिपोर्ट में बताया कि जब्ती सूची के गवाह सतेंद्र कुमार व मिथिला बिहारी सिंह को अनुसंधानक ने रणधीर राय उर्फ हरेंद्र सहनी के खिलाफ गवाही नहीं देने का दबाव बनाया था. वहीं धमकी भी दी थी.
इस बाबत मिथिला बिहारी सिंह ने 19 दिसंबर, 2013 को तत्कालीन एसपी को आवेदन दिया था. मुजफ्फरपुर के औराई थाने के विशनपुर निवासी चौकीदार विश्वनाथ कुर्मी ने एडीजे प्रथम की कोर्ट में लिखित आवेदन देकर बताया था कि विशनपुर गांव में संतोष कुमार नाम का कोई आदमी नहीं है. दारोगा ने भी संतोष की पहचान की थी. सीआइडी के एडीजी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पटना हाइकोर्ट ने न्यायालय को गुमराह करने व दारोगा तथा अधिवक्ता के साथ मिल कर जालसाजी करने के इस मामले में प्राथमिकी का आदेश दिया था. इसके आलोक में एसपी के आदेश पर बेलसंड अंचल इंसपेक्टर रामाकांत सिंह ने 9 दिसंबर, 2016 को प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
एसपी द्वारा गठित पुलिस की स्पेशल टीम ने तीनों को दबोचा
पटना हाइकोर्ट के आदेश पर बेलसंड अंचल के पुलिस इंस्पेक्टर रामाकांत सिंह ने रून्नीसैदपुर थाने में नौ दिसंबर, 2016 को दर्ज करायी थी प्राथमिकी

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