सीतामढ़ी : सदर अस्पताल इन दिनों बिचौलियों के गिरफ्त में है. निजी सुरक्षा गार्ड पर हर माह लाखों खर्च करने के बावजूद सुबह आठ बजे से पूरे रात बिचौलियों की घेराबंदी अस्पताल में आये मरीज पर बना रहता है.
कहने के लिए तो सदर अस्पताल में दो-दो अस्पताल प्रबंधक कार्यरत हैं, लेकिन धरातल पर एक भी प्रबंधक कार्य करते नहीं देखे जाते हैं. वहीं उपाध्यक्ष की मजबूरी यह है कि उनको मिली जिम्मेवारी अभी पहली बार है और सहयोग के लिए प्रबंधक भी नहीं है. जिसके कारण अस्पताल की स्थिति दिन प्रतिदिन चरमरा रहा है. इसका जीता जागता प्रमाण उस समय मिला जब शुक्रवार को दिन के 10 बजे के आस-पास बेलसंड से आये राजेश साह की पत्नी नीलू देवी सदर अस्पताल में प्रसव के लिए भरती हुई.
अस्पताल की व्यवस्था को नकारा बता कर साथ में आयी बेलसंड प्रखंड के रूपौली पंचायत की एक आशा मंजू देवी द्वारा अस्पताल में टहल रहे एक बिचौलिये से सांठ-गांठ कर अस्पताल के बगल में स्थित निजी क्लिनिक में भरती करवा दिया. वैसे अस्पताल में आपात स्थिति में ले जाने के कारण उक्त गर्भवती महिला की मौत हो गयी.
सवाल यह उठता है कि उस गर्भवती महिला को आखिर मारा कौन. अस्पताल की कुव्यवस्था या बिचौलियों द्वारा मरीज के साथ किये जाने वाला धोखाधड़ी या निजी क्लिनिक के संचालक द्वारा पैसा का लोभ, कारण जो भी हो लेकिन गरीब मरीज मरने को विवश है. अस्पताल प्रबंधक के नाम पर तो विजय चंद्र झा मोतिहारी सदर अस्पताल एवं अजीत कुमार सोनबरसा पीएचसी की प्रतिनियुक्ति है, परंतु अस्पताल में उनकी उपस्थिति न के बराबर रहता है, जिसके कारण बिचौलियों की चांदी कट रही है.
कई बार लिखा गया पत्र
सिविल सर्जन डॉ बिंदेश्वरी शर्मा ने बताया कि बिहार स्वास्थ्य विभाग को स्थायी प्रबंधक के लिए कई बार लिखा गया है, परंतु अभी तो तीन-तीन दिन दोनों अस्पताल प्रबंधक काम कर रहे हैं.
डॉ िबंदेश्वरी शर्मा, सिविल सर्जन
