एटीएम के चक्कर काटते रहे ग्राहक

परेशानी . बैंकों की बंदी से शहर की अिधकांश एटीएम में कैश की किल्लत सीतामढ़ी : नोटबंदी के 110 दिन से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी शहर के एटीएम की स्थिति में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है. सबसे बदत्तर स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के एटीएम की है. कैश की किल्लत को झेल […]

परेशानी . बैंकों की बंदी से शहर की अिधकांश एटीएम में कैश की किल्लत

सीतामढ़ी : नोटबंदी के 110 दिन से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी शहर के एटीएम की स्थिति में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है. सबसे बदत्तर स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के एटीएम की है. कैश की किल्लत को झेल रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग एटीएम से रुपये निकासी के लिए शहर आने लगे हैं, किंतु शहर से भी वह उदास होकर लौट रहे है.
बुधवार से मैट्रिक परीक्षा आरंभ होने के बाद एटीएम की उपयोगिता बढ़ गयी है. जिसकी तैयारी एटीएम में पूर्व से होनी चाहिए, लेकिन परीक्षा के पहले दिन अभिभावकों को एटीएम में कैश की किल्लत के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. आधे से अधिक एटीएम में कैश की कमी थी, तो कई खराब पायी गयीं. चालू एटीएम के सामने लंबी-लंबी कतार लगी थी.
एटीएम में छोटे-छोटे नोट नहीं रहने के कारण भी ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी के एकाउंट में 19 सौ रुपये है, तो वह एक हजार या 15 सौ रुपया ही निकाल पा रहा है. शहर के भी करीब आधी एटीएम विभिन्न कारणों से बंद है. जिस एटीएम में रुपये डाले भी जाते हैं, उनमें छोटे नोट नहीं डाले जा रहे हैं. अधिकांश एटीएम से सौ व पांच सौ के नोट नहीं मिलने की शिकायत लगातार की जा रही है.
जिले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सबसे अधिक खाताधारी माने जाते हैं, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि परीक्षा के पहले दिन शहर से लेकर गांव तक एसबीआइ के एक भी एटीएम में कैश नहीं पाया गया.
पैसे निकालने के लिए लोगों का दिन गया बेकार
एटीएम से निकल रहे केवल दो हजार के नोट : अधिकांश एटीएम में अभी भी केवल दो हजार के नोट ही डाले जा रहे हैं, जिसके चलते आम लोगों की परेशानी अभी तक कम नहीं हो सकी है. कभी-कभी 500 व 100 के नोट डाले भी जाते हैं, तो संख्या इतनी कम होती है कि कुछ ही देर बाद खत्म हो जाते हैं. इससे एक बड़ी आबादी के समक्ष परेशानियां बरकरार हैं. जिन लोगों को दो हजार से कम की निकासी करनी है या जिनके खाते में दो हजार से कम राशि है और आपात स्थिति के चलते राशि निकालनी जरूरी है, उनके सामने भारी परेशानी खड़ी हो रही है. बुधवार से मैट्रिक परीक्षा शुरू हुई है. बुधवार तक हजारों परीक्षार्थियों के साथ परिजन भी शहर आ चुके थे. बैंक कर्मचारी हड़ताल पर थे. आधे से भी अधिक एटीएम बंद थी, इसलिए परीक्षार्थियों व अभिभावकों को रुपये की निकासी के लिए यत्र-तत्र भटकना पड़ा. बुधवार की सुबह से ही लोग बैंक- एटीएम का चक्कर लगाना शुरू कर दिये.
10 बजे तक एक भी एटीएम में नहीं डाली गयी थी करेंसी : प्रभात खबर की टीम ने सुबह 7:30 से 10:00 बजे तक शहर के विभिन्न एटीएम का जायजा लिया. इस दौरान अस्पताल रोड स्थित एसबीआइ की एटीएम बंद मिली. इसके अलावा भवदेवपुर स्थित आइसीआइसीआइ बैंक की एटीएम पर ‘मशीन खराब है’ लिखा हुआ था. नगर थाना के सामने एक्सिस बैंक की एटीएम खुली थी,
लेकिन उसमें रुपये नहीं थे. सरावगी चौक के समीप आइडीबीआइ की एटीएम, सिनेमा रोड में आइसीआइसीआइ की एटीएम, प्रेस क्लब के समीप बैंक ऑफ बड़ौदा की एटीएम, मेहसौल चौक स्थित एसबीआइ की एटीएम, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी व एचडीएफसी समेत अन्य सभी बैंकों की एटीएम बंद थी. कुछ एटीएम खुली थी, लेकिन उनमें रुपये नहीं डाले गये थे.
हड़ताल के कारण हुई परेशानी: जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक चिरंजीवी झा ने बताया कि एटीएम में रुपये डालने के लिए विभिन्न एजेंसियों को लगाया गया है. एजेंसियों के पास अपना लॉकर नहीं है, इसलिए बैंक से रुपये लेने के बाद सीधा एटीएम में लोड करता है. बुधवार को बैंक कर्मी हड़ताल पर थे, इसलिए एजेंसियों द्वारा रुपये का उठाव नहीं किया गया था. इसको लेकर सुबह-सुबह एटीएम में रुपये लोड नहीं किया गया होगा. खराब एटीएम के संबंध में बताया कि तकनीकी रूप से खराब एटीएम के बारे में संबंधित बैंक अधिकारियों की ओर से बराबर शिकायत की जाती है, बावजूद बंद पड़े एटीएम को ठीक नहीं कराया जा रहा है, जिसके चलते परेशानी बनी हुई है.
क्या कहते हैं को-ऑडिनेटर: जिले के 70 प्रतिशत एटीएम में कैश लोड करने वाली एनसीआरएफएलएम कंपनी के को-ऑडिनेटर विक्रम कुमार बताते हैं कि एटीएम में कैश लोड करने के लिए करेंसी नहीं दी गयी है. इस कारण एसबीआइ की किसी एटीएम में रुपये नहीं थे. तीन दिन तक बैंक बंद रहने का प्रभाव भी एटीएम पर पड़ा है. शुक्रवार से स्थिति सामान्य होने की पूरी उम्मीद है.

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