नियम के विरुद्ध हुई परिवहन ठेकेदार की बहाली

सीतामढ़ी : प्रशासन डाल-डाल और खाद्यान्न माफिया पात-पात. माफियाओं पर लगातार कसते प्रशासनिक शिकंजे के बाद भले ही जिले में हड़कंप मचा हुआ है, बावजूद इसके माफिया अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे है. ताजा मामला सामने आया है एसएफसी के परिवहन अभिकर्ता की ठेकेदारी में अनियमितता का. एसएफसी मुख्यालय द्वारा परिवहन अभिकर्ता का […]

सीतामढ़ी : प्रशासन डाल-डाल और खाद्यान्न माफिया पात-पात. माफियाओं पर लगातार कसते प्रशासनिक शिकंजे के बाद भले ही जिले में हड़कंप मचा हुआ है, बावजूद इसके माफिया अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे है. ताजा मामला सामने आया है एसएफसी के परिवहन अभिकर्ता की ठेकेदारी में अनियमितता का. एसएफसी मुख्यालय द्वारा परिवहन अभिकर्ता का ठेका देने के लिये तय प्रावधान के विरूद्ध ठेकेदार की बहाली कर दी गयी है.

नियम के अनुसार ठेकेदारी से दागी ठेकेदार के अलावा उसके रिश्तेदारों को भी अलग रखना था. लेकिन गबन के मामले में प्राथमिकी अभियुक्त सह दागी पूर्व ठेकेदार ने अपने रिश्तेदार के नाम ठेकेदारी लेने में कामयाबी पायी है. उक्त ठेकेदार द्वारा रिश्तेदार के नाम पर लाइसेंस लेकर जिले में परिवहन का काम किया जा रहा है. इस बाबत सूबे के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री, मुख्यमंत्री व डीएम को भी शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की गयी है.

बताया गया है कि पूर्व में परिवहन अभिकर्ता के रूप में दूसरे के नाम पर दिलीप साह नामक व्यक्ति ने काम किया और बाद में खुद एसएफसी का ठेकेदार बन गया. बाद में सोनबरसा में सामने आये गबन के मामले में ठेकेदार दिलीप साह के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. इसके चलते परिवहन अभिकर्ता के टेंडर से दिलीप साह को वंचित कर दिया गया. लेकिन उसने समस्तीपुर निवासी अपने रिश्तेदार पप्पू कुमार के नाम पर परिवहन की ठेकेदारी प्राप्त कर लिया. जबकि नियम के अनुसार दागी ठेकेदार के रिश्तेदार को भी परिवहन अभिकर्ता की ठेकेदारी नहीं दी जानी है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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