नोटबंदी. घाटे में चल रहे सिनेमा घर, दर्शकों में 50 फीसदी गिरावट
सीतामढ़ी : कभी सिनेमा घरों की टिकट खिड़की पर टिकट के लिए मारामारी की तस्वीर नजर आती थी, लेकिन नोटबंदी के बाद तस्वीर बदल गई है. सिनेमा घरों की टिकट खिड़की हो या सीटें, दोनों ही खाली जा रहीं है. हालत यह है कि सिनेमा घरों की टिकट खिड़की ही दर्शकों का इंतजार करती नजर आ रहीं है. ऐसे में पिछले एक महीने से सिनेमा घर घाटे में चल रहे है. जिले में सिनेमा का अच्छा-खासा व्यवसाय रहा है. चाहे भोजपुरी फिल्में हो या हिंदी फिल्म, टिकट खिड़की पर दर्शकों की जबरदस्त भीड़ उमड़ती रहीं है. न केवल जिले के लोग बल्कि बड़ी संख्या से नेपाल के इलाकों से दर्शक सिनेमा देखने सीतामढ़ी आते रहे है
लेकिन नोटबंदी का असर सिनेमा घरों पर भी पड़ा है. नोटबंदी की मार से सिनेमा का व्यवसाय भी प्रभावित हुए है. नोटबंदी के चलते दर्शक लगातार सिनेमा घरों से दूर हुए है. ऐसे में सीतामढ़ी शहर के तमाम सिनेमा घर घाटे में चल रहे है. नोटबंदी के बाद नौ नवंबर से ही सिनेमा घरों में दर्शकों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हो रही थी. वर्तमान में सिनेमा घरों में पचास फीसदी दर्शक कम हुए है. हर शो में सिनेमा घर की आधी कुर्सियां खाली रह जा रही है. 800 दर्शकों की क्षमता वाले शहर के थाना रोड स्थित आरडी पिक्चर पैलेस में बेफिक्रे जैसी नई फिल्म लगी है. बावजूद इसके यह फिल्म दर्शकों को नहीं खींच पा रहीं है. सिनेमा घर के एकाउंटेंट अखिलेश कुमार बताते है कि कुछ नोटबंदी व कुछ शीतलहर की वजह से सिनेमा घर घाटे में चल रहे है. बताते है फिल्म नई है,
फिर भी 30 फीसदी सीटें खाली जा रही है. यहीं हाल नूतन सिनेमा का है. 500 दर्शकों की क्षमता वाले वासुश्री सिनेमा घर के टिकट क्लर्क अरविंद कुमार बताते है कि वर्तमान में 50 फीसदी से अधिक दर्शक कम हुए है. दो दिन पूर्व लगी फिल्म देखने भी दर्शक काफी कम संख्या में आ रहे है. जबकि 531 दर्शकों की क्षमता वाले शंकर सिनेमा घर में भी दर्शकों की संख्या में गिरावट है. शंकर सिनेमा के प्रबंधक उमा शंकर प्रसाद बताते है कि हाल के दिनों में दर्शकों की संख्या कम हुई है. कुछ नोटबंदी का प्रभाव है तो कुछ ठंड का भी असर.
सिनेमा हाॅल तक नहीं पहुंच रहे लोग
