सीतामढ़ी : नोटबंदी से एक ओर जहां आम से लेकर खास लोंगों तक को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पुराने 500 व 1 हजार के नोट बंद होने से सरकारी राजस्व की जबरदस्त वसूली हो रही है. इसका एक मुख्य कारण इन बंद हो चुके पुराने नोटों को टैक्स के रूप में स्वीकार किया जाना बताया जाता है.
नगर परिषद के गुदरी बाजार के दर्जनों दुकानदार वर्षों से अपना किराया नहीं चुका रहे थे. इन दुकानदारों पर करीब 15 लाख रूपये बकाया था. लेकिन नोटबंदी के बाद ये दुकानदार तेजी से किराया चुकाना शुरू कर दिये हैं. टैक्स दारोगा कालिका नंदन प्रसाद के अनुसार गुदरी में कुल 73 दुकानें है. इन दुकानों का किराया 250 रूपये से लेकर 6 सौ तक है. लेकिन एक-एक दुकानदारों पर सालों से हजारों रूपये बकाया था. टैक्स दारोगा श्री प्रसाद ने बताया कि हालांकि कुछ दुकानदार ऐसे भी हैं, जो हर माह किराया जमा कराते हैं, लेकिन अधिकांश दुकानदारों पर वर्षों से लगातार बकाया चल रहा था.
टैक्स दारोगा ने बताया कि नोटबंदी से पहले उक्त दुकानदारों पर करीब 15 लाख का बकाया था. पुराने नोटों को स्वीकार करने से कई दुकानदारों ने अपना हिसाब चुकता करा दिया है. श्री प्रसाद ने बताया कि गुदरी बाजार के बकायेदार दुकानदारों से इन पंद्रह दिनों में करीब पांच लाख रुपये राजस्व की वसूली हुई है. आगामी 15 दिसंबर तक पुराने 500 के नोटों को राजस्व वसूली के लिए लेना है, इसलिए अभी और राजस्व की वसूली होने की संभावना है.
कार्यपालक पदाधिकारी तारकेश्वर प्रसाद ने बताया कि आगामी 15 दिसंबर तक नगर परिषद के बकायेदारों को पुराने 500 के नोटों से किराया व होल्डिंग टैक्स चुकाने की छूट दी गयी है. यही हाल नगर के वार्ड नंबर-25 स्थित बाजार समिति का भी है. वहां भी करीब 90 किरायेदार हैं. वहां के किरायेदारों पर भी नोटबंदी के पूर्व तक करीब 15 लाख बकाया था. लेकिन स्थानीय व्यापारियों से मिली जानकारी के अनुसार वहां के बकायेदारों ने भी पुराना बकाया चुकाना शुरू कर दिया है. हालांकि सदर एसडीओ के छुट्टी पर होने से पूरी जानकारी नहीं मिल पायी कि बाजार समिति के बकायेदारों से कितने राजस्व की वसूली हो पायी है.
