रीगा सुगर मिल का डिस्टिलरी डिवीजन होगा बंद

डुमरा (सीतामढ़ी) : राज्य सरकार ने रीगा सुगर मिल के डिस्टिलरी डिवीजन को बंद करने का आदेश दिया है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने मिल के डिस्टिलरी डिवीजन के संचालन पर रोक लगा दी है. आदेश के बाद शनिवार को डीएम राजीव रौशन, एएसपी राजीव रंजन व सदर एसडीओ संजय कृष्ण ने सुगर मिल […]

डुमरा (सीतामढ़ी) : राज्य सरकार ने रीगा सुगर मिल के डिस्टिलरी डिवीजन को बंद करने का आदेश दिया है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने मिल के डिस्टिलरी डिवीजन के संचालन पर रोक लगा दी है. आदेश के बाद शनिवार को डीएम राजीव रौशन, एएसपी राजीव रंजन व सदर एसडीओ संजय कृष्ण ने सुगर मिल पहुंच जांच की. इसकी पुष्टि मिल के पीआरओ विनय कुमार झा ने की. उन्होंने बताया कि डिस्टिलरी में कार्यरत 150 कर्मचारियों को अब बिना काम वेतन देना होगा. इसके अलावा

रीगा सुगर मिल
प्रतिदिन दस किलोलीटर स्प्रिट भी नहीं बन पायेगा. इस कारण डिस्टिलरी को फिर से चालू करने के लिए सरकार के मापदंड के अनुसार काम हो रहा है. उम्मीद है कि दिसंबर तक चालू करने का आदेश मिल जायेगा.
— क्या है मामला
रीगा चीनी मिल इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. किसानों के लिए गन्ना ही एकमात्र नगदी फसल है. मिल परिसर में ही डिस्टिलरी इकाई की स्थापना की गयी थी. जहां शराब निर्माण में प्रयुक्त इथेनॉल का निर्माण होता था. डिस्टीलरी से निकल रहा प्रदूषित काला पानी किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रहा था. डेढ़ दशक से यह पानी न लाखों हेक्टेयर खेत की उर्वरा शक्ति छीन रहा था. साथ ही पानी से पशुओं की मौत भी हो रही थी. रून्नीसैदपुर, बेलसंड, रीगा व परसौनी के किसान इससे अधिक प्रभावित थे. रून्नीसैदपुर के कई गांवों में काले पानी से लोग विकलांग भी हो गये थे. काले पानी पर रोक के लिए लगातार आवाज उठती रही है.
2010 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी आवेदन देकर किसानों ने गुहार लगायी थी. सीएम ने काला पानी का हवाई सर्वेक्षण भी किया था. आयुक्त अतुल प्रसाद भी पानी से होनेवाली समस्याओं को लेकर ट्वीटर पर लिखा था, जो चर्चा का विषय रहा. यहां तक की नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटेकर ने भी रून्नीसैदपुर पहुंच कर किसानों की समस्या से रूबरू हुई थीं.
2010 में सीएम की ओर से गठित टीम ने भी भ्रमण कर मामले की जांच की थी. टीम ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी. इसके बाद से मामला लोकसभा व विधानसभा में लगातार उठता रहा. दूसरी ओर मिल प्रबंधन ने डिस्टिलरी इकाई में प्रदूषित पानी की सफाई के लिए अत्याधुनिक मशीन लगाए जाने का दावा करते हुए किसानों के आरोपों को खारिज कर रहा था.
इसी बीच किसानों ने 2015 में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी थी. इसके बाद पर्षद की टीम ने परसौनी, रून्नीसैदपुर, रीगा व बेलसंड के इलाकों का जायजा लिया था. टीम ने माना था कि डिस्टिलरी का प्रदूषित पानी किसानों की बर्बादी की वजह बन रहा है.
इधर, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने भी जांच के बाद चीनी मिल को 31 दिसंबर 2015 तक प्रदूषित जल को साफ करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण यंत्र लगाने का निर्देश दिया था. मिल के मुख्य प्रबंधक ओमप्रकाश धानुका ने यंत्र लगाने के लिए 31 मार्च 2016 तक की मोहलत मांगी थी. इसकी स्वीकृति प्राधिकरण ने भी दी थी.
लेकिन इसी दौरान 22 नवंबर को राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव एस चंद्रशेखर ने चीनी मिल को दिए गये सहमति आदेश को वापस ले लिया. वहीं, डिस्टिलरी इकाई को बंद करने का आदेश दिया. किसानों की समस्या को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे संयुक्त किसान संघर्ष मोरचा के संस्थापक डॉ आनंद किशार व जिलाध्यक्ष रामतपन सिंह ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया है. इधर सरकार के फैसलों से रीगा, परसौनी, बेलसंड व रून्नीसैदपुर के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गयी है.
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने दिया निर्देश
िमल का जायजा लेने पहुंचे डीएम, एएसपी व सदर एसडीओ
सरकार के निर्णय से किसानों में खुशी की लहर
लाखों किसानों के लिए डिस्टिलरी का पानी बना अभिशाप
150 कर्मचारियों
को अब बिना काम देना होगा वेतन

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