जिला प्रमुख संघ की बैठक में शामिल प्रमुख.
डुमरा : डुमरा प्रखंड प्रमुख व सीडीपीओ विवाद मामले में डीएम के आश्वासन के बावजूद अब तक सीडीपीओ व पर्यवेक्षिकाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से नाराज जिला प्रमुख संघ ने अब समाहरणालय का घेराव कर धरना देने का निर्णय लिया है. सोमवार को डुमरा प्रखंड कार्यालय स्थित प्रमुख कक्ष में जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार लाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जहां सीडीपीओ कक्ष से 2.20 लाख रुपये की बरामदगी के बावजूद सीडीपीओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराये जाने पर सवाल उठाया गया, वहीं प्रमुख के खिलाफ डुमरा थाने में दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं लिए जाने पर आक्रोश जताया गया.
बैठक में 18 नवंबर को समाहरणालय के समक्ष प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी सेविका- सहायिकाओं द्वारा द्वारा उत्पात मचाये जाने की निंदा की गयी. वक्ताओं ने कहा कि सीडीपीओ द्वारा साजिश के तहत सेविका- सहायिकाओं से प्रदर्शन कराया गया.
इस दौरान प्रखंड कार्यालय में भी हंगामा कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गयी थी. इस बाबत डुमरा प्रमुख स्मिता कुमारी द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की गयी थी. आवेदन में प्रमुख ने बताया था कि सीडीपीओ भावना कुमारी के अलावा पर्यवेक्षिका श्वेता सुप्रिया, सुनीता कुमारी, प्रतिभा लता, नूतन कुमारी व आशा कुमारी तथा सेविका मालती देवी समेत सैकड़ों सेविका- सहायिकाओं ने प्रखंड कार्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करते हुए प्रमुख के साथ दुर्व्यवहार व गाली-गलौज किया था. वहीं जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया गया था. माइक से नारेबाजी करते हुए सेविका-सहायिकाओं ने प्रमुख को जान से मारने की भी धमकी दी थी. बावजूद इसके किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी.
बैठक में पूरे मामले पर रोष जताते हुए अविलंब सीडीपीओ व पर्यवेक्षिकाओं के खिलाफ कार्रवाई करने व प्रमुख पर दर्ज मामला वापस लेने की मांग की गयी. अन्यथा पहली दिसंबर को पंचायत प्रतिनिधियों का सम्मेलन कराने के साथ ही समाहरणालय का घेराव कर धरना- प्रदर्शन किया जायेगा. मौके पर ब्रजेश पासवान, मधु देवी, रास नारायण यादव, रेखा देवी, पशुपति प्रसाद, चंद्रकला देवी, राज किशोरी देवी, रेणु देवी व फुल कुमारी देवी आदि मौजूद थी.
डुमरा प्रखंड प्रमुख के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग
मांगों पर नहीं हुई कार्रवाई तो पहली दिसंबर को होगा समाहरणालय का घेराव
जिला प्रमुख संघ की बैठक में सीडीपीओ व पर्यवेक्षिकाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर जताया गया आक्रोश
