सूई देने के लिए सिरिंज तक उपलब्ध नहीं
सीतामढ़ी : प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जिले के लोगों को स्वास्थ्य सेवा का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर जिले के गरीब लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
वे चाह कर भी निजी चिकित्सालय में अपना या अपने परिवार वालों का इलाज नहीं करा पा रहे है. फिलवक्त यही स्थिति सदर अस्पताल सीतामढ़ी की बनी हुई है.
जहां बीमारी से मुक्ति के आशा लिये लोग अस्पताल में प्रवेश करने के बाद मायूस हो जा रहे है. अन्य कारणों के अलावा अभी वर्तमान में दवाओं की किल्लत ने मरीज व परिजन को पूरी तरह परेशान कर दिया है. हालांकि स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए सदर अस्पताल में गत 20 जून से ओपीडी एक पाली में होने के बाद से मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि चालू वर्ष में एक जनवरी से 19 जून तक प्रतिदिन छह से सात सौ मरीज आते थे. वहीं ओपीडी के एक पाली में हो जाने के बाद से मरीजों की संख्या बढ़ कर प्रतिदिन करीब सात से आठ सौ हो गयी है.
जबकि गत वर्ष 2015-16 में ओपीडी दो पाली में चलने के बाद भी मरीजों की संख्या तकरीबन एक हजार के आसपास रहती थी. कारण था कि अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था थी. मरीजों को बहुत कम दवाएं बाहर से खरीद कर लानी पड़ती थी. वह भी सस्ते दामों वाली. अभी दवाओं की कमी के कारण स्वास्थ्य कर्मियों व चिकित्सकों को भी आये दिन मरीजों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है.
अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, ओपीडी में रोजाना करीब सात से आठ सौ मरीज इलाज कराने आ रहे हैं. लेकिन उनके लिए दवाओं का घोर अभाव है. कुल 32 आवश्यक दवाओं में से सभी को मिला कर आठ से 10 प्रकार ही ही दवाएं ही अस्पताल में उपलब्ध है. सूई देने के लिए सिरिंज तक अस्पताल में उपलब्ध नहीं है. कई आवश्यक दवाओं का महीनों से अभाव है, जिसके चलते हर मरीज को बाहर से दवा खरीदनी ही पड़ती है.
बताया गया कि एआरवी यानी कुत्ता काटने की सूई पूरे जिले में पिछले करीब 20 दिनों से नहीं है, जबकि जिले में प्रतिदिन दर्जनों लोग कुत्ते का शिकार हो रहे है. अपने सगे-संबंधी का इलाज कराने आये रोहित, शबनम, आरती, पूजा देवी, रूखसाना खातून, मो अली हुसैन, मो सादिक व मुसमात हलिमा समेत अन्य बताती है कि मेहनत मजदूरी से उनका परिवार चलता है. सदर अस्पताल में दवा नहीं मिलने के कारण वे सूद पर रुपये या गहना-जेवर बंधक रखना पड़ा है.
