वारदात. एक घटना को भूलने की कोशिश करते, तभी दूसरी घटना से सिहर जाते हैं जिले के लोग
कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मियों पर लगातार हो रहे हमले
भाई जी के मरने के बाद व्यवसायियों ने ली थी राहत की सांस
सीतामढ़ी : तामढ़ी व शिवहर जिला के विकास में तकरीबन डेढ़ दशक से नक्सली व आपराधिक संगठन कील ठोक रहे है. आये-दिन आपराधिक संगठन का उदय हो रहा है. एक आपराधिक संगठन का सफाया होने के बाद व्यवसायी व निर्माण कंपनी राहत की सांस सही तरीके से ले भी नहीं पाती, तब तक दूसरे संगठन की दस्तक उनके ऊपर खतरे का बादल बन कर मंडराने लगती है.
इधर, चार माह से व्यवसायियों के लिए आतंक का पर्याय बने हरेंद्र सहनी उर्फ भाई जी के कथित रूप से मारे जाने की सूचना के बाद राहत की सांस ले रही व्यवसायियों व निर्माण कंपनियों के लिए खतरा का पैगाम लेकर न्यू क्षत्रिय संगठन फौज आया है.
दिलचस्प बात यह भी है कि दूसरे संगठन की तरह न्यू क्षत्रिय संगठन फौज के संगठित होने की भनक तक दोनों जिला के पुलिस को नहीं लगी. जो संबंधित थानाध्यक्षों के अलावा वरीय पुलिस पदाधिकारी के सूचना तंत्र पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है. सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए स्पेशल पुलिस ऑफिसर की नियुक्ति भी अनुबंध पर की गयी, किंतु सूचना को लेकर यह तंत्र भी नकारा साबित हो रहा है.
दूसरी बात यह भी है कि डीएम व एसपी के जनता दरबार में आने वाले शिकायतों से यह साबित होता है कि अधिकांश पुलिस पदाधिकारी लंबा समय बीत जाने के बाद भी जनता का विश्वास नहीं जीत सके है. यह कहना गलत नहीं होगा कि जनता के बगैर सूचना तंत्र के मजबूत होने की कल्पना बेमानी है. वैसे भी कुछ वर्ष की घटनाओं के बाद संगठन के सफाया में दो-चार पुलिस पदाधिकारियों की सक्रियता के अलावा अधिकांश की भूमिका मूक दर्शक के रूप में रही है. जगजाहिर है कि न्यू क्षत्रिय संगठन फौज के अलावा निर्माण कंपिनयों पर मुकेश पाठक का भूत अब भी सवार है.
दो माह के अंदर दूसरी धमाकेदार इंट्री : मेजरगंज में निर्माण कंपनी के मुंशी की हत्या के साथ दो माह के अंदर न्यू क्षत्रिय संगठन की यह दूसरी धमाकेदार इंट्री है. जो सीतामढ़ी व शिवहर जिला के व्यापारियों के लिए घोर चिंता का विषय है. मुंशी की हत्या से पूर्व 21 अप्रैल को शिवहर जिला के राम-जानकी मठ, पुरनहिया के महंत बृजनारायण दास की हत्या के बाद संगठन के प्रवक्ता राज सिंह ने जिम्मेदारी ली थी. इस दफा भी मेजरगंज में मुंशी की हत्या के बाद संगठन के प्रवक्ता राज सिंह के हवाले से हत्या की जिम्मेदारी ली है. जिम्मेदारी लेने का मकसद साफ है कि दोनों जिला में खौफ व्याप्त कर रंगदारी वसूलना.
हाल के दिनों में यह भी देखा जा रहा है कि अब जातीय संगठन का उदय हो रहा है. उदाहरण के तौर पर संतोष झा का बिहार पिपुल्स लिबरेशन आर्मी व नीतेश सिंह का आजाद हिंद फौज. अब जातीय संबोधन के साथ न्यू क्षत्रिय संगठन फौज. जो भविष्य को लेकर शुभ संकेत नहीं है. आपराधिक घटनाओं के बाद जातीय तनाव व्याप्त होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
