स्कूल के कमरे में शौच और छत पर होता है जुआ

उदासीनता. गंदगी के कारण दो साल से स्कूल बंद सड़क पर ही लोग शौच करते है. बहुत कम लोगों के पास शौचालय की सुविधा है. शौच के लिए खेतों का उपयोग करने के साथ ही सड़क का भी उपयोग किया जाता है. लोगों में शिक्षा व जागरूकता का अभाव है. तभी तो यहां के लोग […]

उदासीनता. गंदगी के कारण दो साल से स्कूल बंद

सड़क पर ही लोग शौच करते है. बहुत कम लोगों के पास शौचालय की सुविधा है. शौच के लिए खेतों का उपयोग करने के साथ ही सड़क का भी उपयोग किया जाता है. लोगों में शिक्षा व जागरूकता का अभाव है. तभी तो यहां के लोग सड़क पर तो उनके बच्चें स्कूल के कमरे में शौच करते है और युवक स्कूल के छत पर जुआ खेलते है. यह हाल रून्नीसैदुपर प्रखंड की थुम्मा पंचायत के वार्ड नंबर चार का. प्रभात खबर ने बुधवार को उक्त वार्ड का जायजा लिया. प्रस्तुत है वार्ड एक स्कूल का हाल.
सीतामढ़ी : एनएच 77 के किनारे थुम्मा पंचायत है. इस पंचायत में वार्ड नंबर चार में मुख्य सड़क के किनारे एक प्राथमिक विद्यालय है. वार्ड में जाने वाली सड़क पर चारों तरफ शौच ही उक्त वार्ड की पहचान बन गयी है़
एक मात्र यह वार्ड है, जिसकी सड़क पर करीब तीन सौ मीटर में वहां के लोग व बच्चे शौच करते है़ यह सड़‍क गंदगी के चलते वार्ड नंबर चार के लोगों के लिए एक बदनुमा दाग है. यह जानकर हैरानी होगी कि सड़क पर शौच करने के कारण ही प्राथमिक स्कूल में पठन-पाठन बंद करा देना पड़ा और बच्चों को दूसरे स्कूल से टैग कर देना पड़ा. तीन चार वर्षों से बच्चे मध्य विद्यालय, थुम्मा बाजार पढ़ने जाते है.
अधिकारी कहते है कि जब ग्रामीण स्कूल के समीप सड़क पर शौच करना बंद नहीं किये तो उन्हें उक्त स्कूल को दूसरे स्कूल में टैग करना पड़ा था. अभी भी टोला के लोगों में सुधार नहीं आया है.
ऐसे बंद हुआ स्कूल : वार्ड नंबर चार में महादलित समाज की संख्या अधिक है. नौनिहालों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्राथमिक स्कूल खोला गया. दो तीन वर्ष पढ़ाई हुई. एक शिक्षक व एक शिक्षिका मंजू कुमारी थी. छुट्टी के बाद स्कूल के कमरों में बच्चे शौच कर देते थे.
स्कूल के सामने से गुजरने वाली सड़क पर करीब तीन सौ मीटर में शौच ही शौच दिखायी देता है. नाक पर बिना कपड़ा रखे उस होकर कोई नहीं गुजर सकता है. यह बात अलग है कि वहां के लोगों को शौच के बीच से आने-जाने की आदत बन गयी है. शिक्षिका मंजू कुमारी शौच के दुर्गंध से आजीज आकर स्कूल को दूसरे स्कूल में टैग कराने के लिए बीइओ को पत्र लिखा.
बीइओ बालेश्वर चौधरी ग्रामीणों से स्कूल के सामने सड़क पर शौच नहीं करने की बात कही. श्री चौधरी हार गये और ग्रामीण जीत गये. यानी ग्रामीणों ने सड़क पर शौच करना बंद नहीं किया. अंत में बीइओ को उक्त स्कूल को मवि थुम्मा से टैग कर देना पड़ा. वह स्कूल वार्ड चार से करीब एक किमी पर है. बहुत कम बच्चे वहां पढ़ने जा पाते है. नवनिर्वाचित वार्ड सदस्या सरस्वती देवी ने बताया कि वार्ड के स्कूल में पठन-पाठन शुरू कराने के लिए वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी.
लोगों को महसूस नहीं हो रही सुधार करने की बात
अब जाने स्कूल भवन का हाल: ग्रामीण नवलकिशोर बैठा, सोलेंद्र बैठा व हरिकिशोर राय बताते है कि करीब सात आठ वर्ष पूर्व स्कूल का भवन बना था जो आज भी अधूरा है. शौचालय का कमरा बना पर सीट नहीं लगा. टंकी पर ढक्कन नहीं डाला गया. कमरे में बच्चे शौच करते है. असामाजिक तत्व लोहे की खिड़कियां उखाड़ ले गये. संवेदक द्वारा भवन निर्माण में काफी गड़बड़ी की गयी. खिड़की और किवाड़ उखड़ने के साथ ही टूट गए है. चापाकल ठप है़ शौचालय नहीं होने के कारण शिक्षक स्कूल में नहीं टिकते है और तबादला करा लेते है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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