फूटे बम, पसरा खौफ और बेखबर जवान
सीतामढ़ी/मेजरगंज : नेपाली डकैतों की कारस्तानी भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों की मुस्तैदी पर अब भारी पड़ने लगा है. सीमा पार कर डकैत बेखौफ होकर आते हैं और घटना को अंजाम देकर आराम से चले जाते हैं, लेकिन इसकी भनक पुलिस तो दूर सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों को भी नहीं लगती. मेजरगंज थाना […]
सीतामढ़ी/मेजरगंज : नेपाली डकैतों की कारस्तानी भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों की मुस्तैदी पर अब भारी पड़ने लगा है. सीमा पार कर डकैत बेखौफ होकर आते हैं और घटना को अंजाम देकर आराम से चले जाते हैं, लेकिन इसकी भनक पुलिस तो दूर सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों को भी नहीं लगती. मेजरगंज थाना के माधोपुर गांव में सोमवार की रात किसान राम एकबाल सिंह एवं शिवराम सिंह के घर हुई भीषण डकैती ने सुरक्षा के लिहाज से बड़ा गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है.
इसका विरोध अब एसएसबी अधिकारियों को भी झेलना पड़ रहा है. घटनास्थल से महज 100 गज की दूरी पर माधोपुर एसएसबी कैंप और हेड क्वार्टर है. ग्रामीण कैंप को लगातार मोबाइल पर कॉल करता रहा, लेकिन अधिकारी और जवान बेखबर रहे.
जवानों की मुस्तैदी पर उठी अंगुली: इधर दु:साहसी डकैत लगातार बम फोड़ कर पूरे गांव में दहशत फैला दिया, मगर बम की आवाज जवानों तक नहीं पहुंचना आश्चर्य जताता है. पिछले एक माह के अंदर उक्त पंचायत में डकैती की दूसरी बड़ी घटना है. उस समय भी एसएसबी की गतिविधियों पर अंगुली उठी थी. ग्रामीणों के अनुसार, डकैती होने की सूचना पहले एसएसबी कैंप को हीं दी गयी.
एक घंटा बाद पहुंचे अधिकारी: कई बार कॉल करने के बाद सहायक सेनानायक राजन कुमार एक घंटा बाद जवानों के साथ पहुंचे. ग्रामीणों ने जब सुरक्षा को लेकर शिकायत की तो उनका तर्क बड़ा अजीबोगरीब था. उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि यह काम पुलिस का है, वह सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात हैं. सवाल यह है कि सीमा अगर सुरक्षित है तो फिर डकैतों को कहर बरपाने का मौका कैसे मिल जाता है? तब तो फिर कोई आतंकी भी घुसपैठ कर कहर बरपा सकता है.