कठौर गांव के शेख टोली में आगजनी से हुई तबाही पर भयभीत हैं ग्रामीण

तबाही से निबटने में लग जायेंगे वर्षों परसौनी : प्रखंड की कठौर गांव के शेख टोली में आगजनी से हुई तबाही से निबटने में पीडि़तों को वर्षों लग जायेंगे. एक-एक पैसा जमा कर फूस का घर बनाये लोगों को पुन: ऐसा घर बनाने में काफी वक्त लग जायेंगे. प्रशासन के स्तर से मदद की गयी […]

तबाही से निबटने में लग जायेंगे वर्षों

परसौनी : प्रखंड की कठौर गांव के शेख टोली में आगजनी से हुई तबाही से निबटने में पीडि़तों को वर्षों लग जायेंगे. एक-एक पैसा जमा कर फूस का घर बनाये लोगों को पुन: ऐसा घर बनाने में काफी वक्त लग जायेंगे. प्रशासन के स्तर से मदद की गयी है, पर वह नाकाफी है.
दूसरे लोग करा रहे भोजन
सभी अग्निपीडि़त आर्थिक रूप से कमजोर हैं. आग ने उनका सब कुछ निगल गया. पुन: अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश शुरू भी कर दी गयी है. गांव के नजीर अंसारी ने शनिवार को मुबारक के जनाजे के बाद सभी पीडि़तों को भोजन कराया. वहीं रात का भोजन मो अमीन अंसारी ने कराया. शनिवार की सुबह अमीन ने हीं पीडि़तों को नाश्ता तो मुसलिम अंसारी नामक एक व्यक्ति ने सबों को भोजन कराया.
पीडि़तों के मदद को बढ़े हाथ
अग्निपीडि़तों की मदद के लिए कई लोगों ने इंसानियत का परिचय दिया है. प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों ने भी मदद की है. स्थानीय मुखिया ज्योति नारायण पांडेय ने कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत मृतक के परिजन को नगद दो हजार दिया. विधायक प्रतिनिधि राणा रणधीर सिंह चौहान ने भी मृतक के परिजन को नगद एक हजार दिया. पीडि़तों के दर्द को पान दुकानदार एकनाथ ने नजदीक से समझा है. उसने पीडि़तों के बीच पांच किलो चूड़ा दिया है. कठौर के नवीन साह ने पीडि़त अख्तर अंसारी व जैनुल अंसारी को घरेलू सामग्री खरीदने के लिए नगद 500-500 रुपये दिया है. परसौनी के चुल्हाई साह भी मदद करने में अपने को रोक नहीं पाये.
श्री साह ने अख्तर अंसारी को डेढ़ क्विंटल चावल दिया है. बता दें कि अख्तर अंसारी बीड़ी तैयार कर बेचा करते हैं. अग्निकांड में बीड़ी पत्ता, मसाला व तैयार बीड़ी यानी करीब 50 हजार की संपत्ति जल गयी.
नौ पीडि़तों को 68-68 सौ
शुक्रवार की शाम में हीं विधायक प्रतिनिधि श्री चौहान व सीओ अजय कुमार ठाकुर ने संयुक्त रूप से नौ अग्निपीडि़तों को नगद 68-68 सौ दिया. इनमें प्रमीना खातून, मो अख्तर अंसारी, मो खुरशैद, मो असलम अंसारी, मो जलामुद्दीन, अबरून खातून, मु मरियम खातून, जैनुल अंसारी व बतलुन खातून शामिल हैं. श्री चौहान व सीओ ने मृतक मुबारक की मां प्रमीना खातून को आपदा प्रबंधन मद से चार लाख का चेक भी दिया. यहां बता दें कि मरियम खातून के दो पुत्र हैं और दोनों बाहर रहते हैं. मरियम घर पर अकेली रहती है.
कमरे में जाने से डर रहे परिजन
मुबारक हुसैन की मौत की सदमे से उसके परिजन निकट भविष्य में शायद हीं उबर पायेंगे. एक तो मुबारक नौजवान था और दूसरा कि वह घर का इकलौता चिराग था. अब भी परिवार के सभी सदस्यों का रोते-रोते बुरा हाल है. उसके चाचा खुरशैद अंसारी भी काफी सदमे में हैं. कारण कि उनकी आखों के सामने हीं मुबारक धू-धू कर जल गया और काफी प्रयास के बावजूद वे उसे नहीं बचा सके थे. मुबारक की मौत के चलते डर से उसके परिजन कमरे में नहीं जा रहे हैं. अधिकांश अग्निपीडि़त मसजिद या दूसरे के घरों में रह कर समय काट रहे हैं.
नये सिरे से जिंदगी शुरू
शेख टोली के लोग हाल के वर्षों में अग्निकांड की दो भीषण घटनायें देख लिये. शुक्रवार की रात एक तरह से अपना सब कुछ गवां चुके बीड़ी कारोबारी अख्तर अंसारी नये सिरे से जिंदगी जीना शुरू कर दिये हैं. यानी बच्चों की मदद से वे फिर बीड़ी बनाने लगे हैं. कहते हैं कि यह सब नहीं करने पर भूखे मर जायेंगे. पेट की खातिर करना हीं पड़ेगा.
शादी का सामान भी जला
खुरशैद अंसारी अपनी पुत्री तबीला खातून की अगले वर्ष शादी करने वाले थे. एक वर्ष पूर्व से हीं शादी की तैयारी शुरू कर दिये थे. कोशिश कर रहे थे कि बिटिया की शादी में कोई कमी न रह जाये. अग्निकांड में पुत्री को देने के लिए खरीद कर घर में रखे पेटी, ट्रंक व अन्य सामन भी जल गया. पुत्री तबीला गुल्लक में एक-एक पैसा जमा करती थी ताकि कोई बेहतर चीज खरीद सके. अग्निकांड से उसके सपने पर पानी फिर गया. खुरशैद अंसारी बेटी की शादी के लिए सहारा इंडिया में पैसा जमा करते थे. उसका पासबुक भी जल कर खाक हो गया.

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