20 लाख का मिला आवंटन
एक अप्रैल से ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही नगर पंचायतों में देशी व विदेशी शराबों की बिक्री बंद हो जायेगी. स्वाभाविक है कि शराब के आदतन लोगों को बेचैनी महसूस होगी. वे पूरी कोशिश करेंगे कि शराब की भरपाई कैसे करें. बहुत से लोग पूरी तरह शराब छोड़ देंगे तो बहुत से लोग ऐसे होंगे, जिनसे शराब की आदत शायद जल्दी छूट जायेगी. ऐसे लोगों से शराब का लत छुड़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस लिया है.
सीतामढ़ी : एक अप्रैल से शराब बंदी को शत-प्रतिशत धरातल पर लागू करने के लिए सरकार व प्रशासन ने कमर कस लिया है. सीएम नीतीश कुमार की घोषणा के बाद से ही अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा रही है. साथ हीं इसकी भी तैयारी की जा रही है कि अचानक शराब से नाता खत्म होने के बाद शराब पीने के आदि लोगों की बेचैनी को कैसे कम व दूर किया जाये. इसके लिए सदर अस्पताल में ‘नशा मुक्ति केंद्र’ खोला जा रहा है.
24 घंटे चिकित्सक की निगरानी
केंद्र यानी विशेष वार्ड में भरती होने वाले शराबियों पर चिकित्सक 24 घंटे निगरानी रखेंगे. तीन चिकित्सकों की तैनाती की जानी है जो विशेष वार्ड में आठ-आठ घंटा की ड्यूटी करेंगे. इस वार्ड के लिए अलग से एक-एक कंपाउंडर, लिपिक व फार्मासिस्ट की नियुक्ति की जानी है. यह नशा मुक्ति केंद्र पूरी तरह हाईटेक व सुरक्षित होगा.
शौचालय में नहीं होगा कुंडी
नशा मुक्ति केंद्र में भरती होने वाले मरीजों के लिए दो शौचालय का निर्माण कराया जायेगा. खास बात यह कि दोनों शौचालय के अंदर से कुंडी नहीं रहेगा. इसके पीछे के कारणों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. श्री सिंह ने बताया कि डीएम के आदेश के आलोक में केंद्र खोलने से संबंधित तैयारियां पूरी तेजी से की जा रही है. उक्त वार्ड के भेंटीलेटर को पूरी तरह सील कर दिया जायेगा. खिड़की में मजबूत छड़ लगाया जायेगा.
ताकि इलाज के दौरान शराब का आदि कोई व्यक्ति केंद्र से भागने की कोशिश न करे. सरकार यह भलीभांति जानती है कि शराब के आदि लोगों की संख्या कम नहीं है. शराब बंदी के बाद शराब के आदि लोगों को इसका लत छुड़ाने में वर्षों लग जायेंगे. इस सोच के साथ सरकार ने निकट भविष्य में 40 बेड का नया अस्पताल बनाने का निर्णय लिया है. यानी इस अस्पताल में सिर्फ शराब के आदि लोग हीं भरती होंगे. स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन को पत्र भेज 40 बेड के अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध कराने को कहा है.
