तत्कालीन डीइओ की कार्यशैली पर सवाल
सीतामढ़ी : श्री मथुरा प्रसाद कैप्टन रामनिवास महिला कॉलेज की प्राचार्या रंजना सिन्हा की कुरसी पर खतरे का बादल मंडराने लगा है. माना जा रहा है कि अब वह चंद दिन ही प्राचार्या की कुरसी पर रह पायेगी. इस बीच, उनका निलंबन रद्द कर प्राचार्या के पद पर कार्य करने की अनुमति देकर डीइओ खुद फंस गये हैं. कारण कि डीइओ को इस तरह की अनुमति देने का कोई अधिकार ही नहीं है.
अध्यक्ष ने की शिकायत
कॉलेज के शासी निकाय एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष विंदा प्रसाद सिन्हा की शिकायत पर माध्यमिक शिक्षा के निदेशक केवीएन सिंह ने डीइओ से स्पष्टीकरण पूछा है. डीइओ को भेजे पत्र में निदेशक ने कहा है कि रंजना सिन्हा को निलंबन से मुक्त करते हुए प्राचार्या के पद पर कार्य करने की अनुमति दी गयी है, जिसके लिए वे सक्षम प्राधिकार नहीं हैं. डीइओ को तीन दिनों के अंदर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि किसी प्राधिकृत शक्ति के तहत यह निर्णय लिया गया.
निर्णय से नये डीइओ हैं असंतुष्ट
बता दें कि हाल तक डीइओ रहे जयप्रकाश शर्मा के 14 जनवरी के आदेश के आलोक में रंजना सिन्हा ने 18 जनवरी 16 को प्राचार्या का पदभार संभाला था.
इसी बीच शासी निकाय के अध्यक्ष ने माध्यमिक शिक्षा के निदेशक से शिकायत कर दी. निदेशक ने डीइओ को भेजे पत्र की प्रति डीएम के अलावा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव को भी भेजी है. इस बीच, नये डीइओ उमेश प्रसाद सिंह भी रंजना सिन्हा को प्राचार्या का पद संभालने से संबंधित डीइओ रहे शर्मा के आदेश से संतुष्ट नहीं हैं. इसी से यह कयास लगाया जा रहा है कि सिन्हा अब कम ही दिन प्राचार्या की कुरसी पर रह पायेंगे.
अब जानें पूरा मामला
सिन्हा को प्राचार्या की कुरसी से हटाने व दोबारा बैठाने का मामला काफी गंभीर बन गया है. वैसे वह दिन दूर नहीं जब सब कुछ स्पष्ट हो जायेगा. बताया जाता है सिन्हा सबसे पहले 17 अगस्त 91 को प्राचार्या की कुरसी संभाली थी. आठ जुलाई 13 को शासी निकाय ने एक निर्णय लेकर सिन्हा को निलंबित कर दिया. उनकी शिकायत पर डीएम के आदेश के आलोक में तत्कालीन डीइओ ने जांच कर रिपोर्ट दिया कि विभाग द्वारा शासी निकाय को वर्ष 2012 में हीं भंग कर दिया गया था. इस लिहाज से शासी निकाय का निर्णय वैध नहीं है. सदर एसडीओ ने भी डीइओ की रिपोर्ट पर सहमति जतायी थी. डीइओ रहे शर्मा ने 14 जनवरी को सिन्हा को निलंबन से मुक्त करने के साथ ही प्रचार्या का दायित्व संभालने का आदेश दे दिया था. हालांकि पत्र में शर्मा ने यह स्पष्ट कर दिया था कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अथवा किसी उच्चाधिकारी द्वारा अन्यथा आदेश पारित होने पर उनका आदेश स्वत: प्रभावित समझा जायेगा. बता दें कि पीओ रामजी पासवान ने भी उक्त मामले की जांच की थी और उन्होंने शासी निकाय व प्रबंध समिति पर सवाल खड़ा किये थे.
