सीतामढ़ी : अक्सर खबरें आती है कि रेल यात्रा सुगम हो रहा है. रेल प्रशासन सख्ती से अपना काम कर रही है, पर रेल की यात्रा करने पर सच्चाई का पता चलता है. दरभंगा-रक्सौल रेलखंड इसका उदाहरण बना हुआ है. इस रेल खंड से दर्जनों छोटे- बड़े व्यवसायी सामान के साथ यात्रा करते हैं. उनका […]
सीतामढ़ी : अक्सर खबरें आती है कि रेल यात्रा सुगम हो रहा है. रेल प्रशासन सख्ती से अपना काम कर रही है, पर रेल की यात्रा करने पर सच्चाई का पता चलता है. दरभंगा-रक्सौल रेलखंड इसका उदाहरण बना हुआ है. इस रेल खंड से दर्जनों छोटे- बड़े व्यवसायी सामान के साथ यात्रा करते हैं.
उनका सामान भी उनके साथ रहता है, पर तरीके नये होते हैं. देखा जाता है कि खास कर छोटे व्यवसायी अपना सामान बोगी में जाने के रास्ते व बाथरूम वाली गली में रखते हैं, जिसके चलते यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने व उतरने में काफी परेशानी होती है. इस बात को लेकर अक्सर व्यवसायी व यात्रियों में अक्सर तू-तू-मैं-मैं होता रहता है, पर रेल प्रशासन इसे नजरअंदाज कर आगे निकल जाते हैं. इसका मुख्य कारण व्यवसायियों द्वारा दिया गया नजराना है.
राजस्व की होती है क्षति
रेल सूत्रों ने बताया कि प्रतिदिन दर्जनों व्यवसायी रूटीन वे में बिना बुक कराये सामन लेकर रक्सौल, घोड़ासहन, बैरगनिया आदि स्टेशनों से सीतामढ़ी व अन्य स्टेशनों पर आते हैं. इसके बदले रेल प्रशासन को 10 से 100 रुपये तक नजराना दिया जाता है. हाल यह है कि यदि ये व्यवसायी अपने सामन की बुकिंग कराने जाते हैं
तो रेल प्रशासन महकमे के कुछ कर्मियों द्वारा उन्हें इशारा कर बिना बुक कराये सामान ले जाने की बात बताया जाता है. ऐसा होने रेलवे को प्रतिदिन हजारों रुपये की क्षति होती है, पर इसे देखने वाला कोई नहीं है.
कहते हैं आरपीएफ निरीक्षक
इस बाबत आरपीएफ निरीक्षक एसएन राम ने बताया कि बल की कमी के चलते दो दिन कुछ परेशानी हुई है. अब स्थिति सामान्य है. सवारी व एक्सप्रेस ट्रेन से आने-जाने वाले व्यवसायी व सामग्री पर पैनी नजर रखी जा रही है.