एक हाथ से विकलांग, पर हौसले में कमी नहीं फोटो नंबर- 1 कपड़ा बेचने जाता नूर हसन परिहार. कहा जाता है कि हाथ की लकीर में किस्मत लिखी है, पर नूर हसन की लकीर वाली हाथ ही नहीं हैं. वह खुद की बदौलत एक नयी लकीर खींचने की कोशिश की है और एक मिसाल बन गया है. नूर हसन ने यह साबित कर दिया है कि यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो रास्ते में आने वाली सारी बाधाएं दूर जरूर हो जाती है. 15 वर्ष पूर्व की बात है, जब बिजली की चपेट में आने से नूर का हाथ जख्मी हो गया था और बाद में वह हाथ ही गंवा बैठा. प्रखंड के गौसनगर गांव के यासीन अंसारी का पुत्र नूर हसन हाथ गंवाने के बाद दिल्ली में जड़ी का काम करने लगा. वहां यह काम मंद पड़ने पर गांव लौट आया और करीब तीन वर्ष से साइकिल पर कपड़े की गठरी लाद ग्रामीण क्षेत्रों में बेचा करता है. वह प्रतिदिन करीब 20-25 किलोमीटर साइकिल चलाता है. खास बात यह कि वह मात्र एक हाथ के सहारे ही साइकिल चलाता है. सरकारी सुविधा के नाम पर उसे विकलांग पेंशन मिलता है.
एक हाथ से विकलांग, पर हौसले में कमी नहीं
एक हाथ से विकलांग, पर हौसले में कमी नहीं फोटो नंबर- 1 कपड़ा बेचने जाता नूर हसन परिहार. कहा जाता है कि हाथ की लकीर में किस्मत लिखी है, पर नूर हसन की लकीर वाली हाथ ही नहीं हैं. वह खुद की बदौलत एक नयी लकीर खींचने की कोशिश की है और एक मिसाल बन […]
