..यहां स्टेशन पर गुजरती हैं रातें

..यहां स्टेशन पर गुजरती हैं रातें फोटो नंबर-4 से 8 तक स्टेशन पर लोगों की ऐसे गुजरती है रात सीतामढ़ी. कहा जाता है कि गरीबी सबसे बड़ा अभिशाप है. पेट की खातिर लोगों को कितनी मेहनत व सितम उठानी पड़ती है, यह देखना हो तो अन्य जगहों के अलावा रात में सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन पर […]

..यहां स्टेशन पर गुजरती हैं रातें फोटो नंबर-4 से 8 तक स्टेशन पर लोगों की ऐसे गुजरती है रात सीतामढ़ी. कहा जाता है कि गरीबी सबसे बड़ा अभिशाप है. पेट की खातिर लोगों को कितनी मेहनत व सितम उठानी पड़ती है, यह देखना हो तो अन्य जगहों के अलावा रात में सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन पर देखा जा सकता है. खुद व बाल-बच्चों की पेट की खातिर कैसे कोई रिक्शा चालक दिन भर रिक्शा चलाता है और स्टेशन परिसर में जैसे-तैसे सो कर रात बिता लेता है. पसीज जाता है दिल स्टेशन के प्लेटफॉर्म व बाहर में यात्री व मजदूर वर्ग के लोग जिस हालात में सोये रहते हैं, वह देख पत्थर दिल भी पसीज जाता है और तब लोगों को लगता है कि वास्तव में रिक्शा चलाने वाले व मजदूरी कर पेट भरने वाले न जाने कितनी मेहनत करते हैं और कैसे धूप, बारिश व ठंड में अपने शरीर को कष्ट देते हैं. सुरसंड प्रखंड के रधाउर गांव का रिक्शा चालक सुधीर कहता है कि पेट की खातिर शरीर को कष्ट देना लाजिमी है. घरारी को छोड़ खेती के लिए जमीन नहीं है. आय का एक मात्र साधन रिक्शा ही है. इससे उतनी आय नहीं हो पाती है कि स्टेशन परिसर को छोड़ किसी बेहतर ठौर पर रात गुजारे. इसी तरह की बातें और रिक्शा चालकों ने कही. पुल के नीचे गुजारते हैं रात रात में स्टेशन पर यात्रियों को सोने के लिए भी जगह नहीं मिल पाती है. रात में ट्रेनें कम चलती है. ट्रेन के इंतजार में यात्री स्टेशन पर रात गुजारने को विवश होते हैं. अधिकांश रात में देखा जाता है कि यात्रियों से प्रतीक्षालय भर जाता है और शेष यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए बनाये गये पुल के नीचे रात गुजारनी पड़ती है.

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