सीतामढ़ी/नानपुर/बोखड़ा/चोरौत : जिले में भाई के दीर्घायु की कामना के साथ भैया दूज पर्व मनाया गया. यह पर्व ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर में भी मनाया जाता है. यह पूजा चावल के पीठार, सिंदूर, कुम्हर के फूल, पान, सुपारी, गंगाजल, चांदी का सिक्का व अन्य सामग्री के साथ की जाती है.
बहन भाई के हाथ पर उक्त सामग्री रख कर उसकी पूजा करने के साथ हीं उसके दीर्घायु होने की कामना करती है. भाई को बहन के यहां भोजन करना होता है. — तेहन हमर भैया के आयुरदा पूजा के दौरान मोहल्ला की महिलाएं एक जगह इकट्ठा होती है. जगह को गोबर से लीप कर चारों ओर से महिलाएं बैठती है और उक्त सामग्री के साथ पूजा करती है.
इस दौरान तरह-तरह की गीत भी गाती है. एक गीत है ‘ गंगा न्योतलन यमुना के, हम न्योतइछी भाई के, जेहन गंगा-यमुना के बाढ़, तेहन भैया के आयुरदा’. — भैया दूज का महत्व बोखड़ा प्रखंड के खड़का गांव की ललिता रानी, मोती देवी, बबिता देवी, हेना देवी व आशा रानी ने भैया दूज के महत्व को बताया. बताया कि यमराज व यमुना भाई-बहन थे.
यमराज को आयु क्षीण का दोष था. इसके चलते परिवार के लोग चिंतित रहते थे. बहन यमुना ने परिवार को इस संकट से उबारने के लिए उखर में अंकुरी व धान मुसर से कुट कर उसमें पांच नदियों का जल मिला कर भाई के हाथ पर रख कर पूजा की और यमराज के दीर्घायु होने की कामना की. इसकी पूजा से खुश होकर भगवान विष्णु ने यमराज को दीर्घायु बना दिया. उसी समय से कार्तिक द्वितीया के दिन हर बहन अपने भाई के लंबी उम्र के लिए भैया दूज करती है.
