दो पूर्व मंत्री हारे, डॉ रंजू के गले में विजयी की माला

दो पूर्व मंत्री हारे, डॉ रंजू के गले में विजयी की माला फोटो नंबर-41, लोगों का अभिवादन करती डॉ रंजू गीता सीतामढ़ी. विस चुनाव में लंबे समय तक राजनीतिक सफर तय करते हुए दो बार बिहार सरकार के मंत्री रहे शाहिद अली खान व सुनील कुमार पिंटू चुनाव हार गये, लेकिन तमाम अटकलों का विराम […]

दो पूर्व मंत्री हारे, डॉ रंजू के गले में विजयी की माला फोटो नंबर-41, लोगों का अभिवादन करती डॉ रंजू गीता सीतामढ़ी. विस चुनाव में लंबे समय तक राजनीतिक सफर तय करते हुए दो बार बिहार सरकार के मंत्री रहे शाहिद अली खान व सुनील कुमार पिंटू चुनाव हार गये, लेकिन तमाम अटकलों का विराम देते हुए निवर्तमान गन्ना मंत्री डॉ रंजू गीता के गले में एक बार फिर से विजयी की माला है. नालंदा जिला के हिलसा प्रखंड अंतर्गत नेसरा गांव में डॉ रंजू गीता का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. मां सरोज देवी भी साधारण गृहणी थी. 1192 में डॉ रंजू की शादी सीतामढ़ी के बाजपट्टी प्रखंड अंतर्गत बसहा गांव निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक रास बिहारी यादव के तृतीय पुत्र दिलीप कुमार से हुई. डॉ रंजू के ससुर बाद में मधुबन बसहा पंचायत के मुखिया भी बने. डॉ रंजू कहती हैं कि पति व ससुर की प्रेरणा व मार्गदर्शन में वह समाज सेवा में अपना भरपूर वक्त देने लगी. परिणामस्वरूप 2009 में वह बाजपट्टी विस क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य बनी. फिर वर्ष 2008 में जिला परिषद की अध्यक्ष बनी. मजदूरों के पलायन को रोकने में बाधा बन रही सरकारी योजनाओं को कार्यान्वित कराने के कारण जिला प्रशासन से विवाद के बाद वह 14 दिनों तक कारावास की सजा भी काट चुकी है. 2006 में जदयू की सदस्यता ग्रहण की. 2010 में बापजट्टी विस क्षेत्र से मतदाताओं ने अपना भरपूर समर्थन देकर विधायक बनी. उन्हें मंत्री भी बनाया गया. डॉ रंजू का कहना है कि वह क्षेत्र के विकास के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगी.

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