सीतामढ़ी : कोई व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से किस हद तक ठीक है, यह रिपोर्ट कल तक चिकित्सक देते आये हैं, पर जिले के विभिन्न थानाध्यक्षों द्वारा अपने स्तर से यह रिपोर्ट दिया जा रहा है. इसे सदर एसडीओ संजीव कुमार ने गंभीरता से लिया है और संबंधित थानाध्यक्षों से उक्त आशय के बाबत जवाब मांगा है.
शस्त्र के आवेदकों का मामला
शस्त्र के लिए दिया गया आवेदन थाना, डीएसपी व एसडीओ के यहां से होते हुए डीएम के पास जाता है. आवेदन के साथ एक फॉर्म भरा जाता है. फॉर्म में कुल 24 बिंदुओं को भरना पड़ता है.
यह काम थानाध्यक्ष करते हैं. फॉर्म के क्रमांक 15 में लिखा होता है कि आवेदक अग्नेयास्त्र चलाने में शारीरिक व मानसिक रूप से योग्य है? जवाब में पुलिस द्वारा लिखा जाता है ‘योग्य है’. इस तरह के कई आवेदनों के साथ थानाध्यक्षों द्वारा भेजे गये उक्त जवाब को ले सदर एसडीओ ने पत्र भेज पूछा है कि आवेदक के शारीरिक व मानसिक रूप से ठीक होने का चिकित्सक का प्रमाण पत्र है अथवा नहीं?
शस्त्र का लाइसेंस आसान नहीं
कल तक शस्त्र लाइसेंस लेना आसान था. अब यह कठिन हो गया है. कल तक आवेदक पुलिस व अधिकारी के यहां पैरवी करा कर शस्त्र का लाइसेंस ले लेते थे. तब यह नहीं देखा जाता था कि शस्त्र लेने वाला आवेदक शारीरिक व मानसिक रूप से ठीक है कि नहीं. चिकित्सक का प्रमाण पत्र नहीं खोजा जाता था. पुलिस के प्रतिवेदन पर हीं सब कुछ संभव हो जाता था. इस गड़बड़ी पर सदर एसडीओ की नजर गयी है.
अच्छी स्थिति होने का दें प्रमाण
एसडीओ ने विभिन्न थानाध्यक्षों से कहा है कि आवेदक की स्थिति अच्छी होने व अग्नेयास्त्र रखने लायक होने की बाबत भेजे गये प्रतिवेदन का आधार क्या है. आवेदक द्वारा आय का कोई प्रमाण पत्र दिया गया है? पूछा है कि आवेदक न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का पालन करते हैं और उनके खिलाफ कोई वाद नहीं चल रहा है. ऐसा लिखने का आधार क्या है? क्या श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी से प्रतिवेदन प्राप्त किया गया है?
किससे है जानमाल की क्षति
फॉर्म में इसका भी उल्लेख रहता है कि आवेदक को सुरक्षा के लिए अग्नेयास्त्र जरूरी है. थानाध्यक्ष भी ‘जरूरी’ लिख कर एसडीओ के यहां आवेदन व फॉर्म भेज देते हैं. एसडीओ श्री कुमार ने संबंधित थानाध्यक्षों से पूछा है कि आवेदकों को किससे जान का खतरा है? जिनसे खतरा है, उनके खिलाफ सनहा या प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है? यदि प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है तो वर्तमान में स्थिति क्या है?
अपराध नियंत्रण में मदद, कैसे?
थानाध्यक्ष रिपोर्ट में यह लिखते हैं कि आवेदक अपराध नियंत्रण में मदद करते हैं. ग्राम रक्षा दल में भी सहयोग करते हैं.
इस पर एसडीओ ने संबंधित थानाध्यक्षों से पूछा है कि आवेदक किस रूप में मदद किये हुए हैं.प्रतिवेदन से यह पता नहीं चलता है कि आवेदक ग्राम रक्षा दल में सक्रिय रूप से भाग लिये हैं. थानाध्यक्षों को उक्त आशय का जवाब डीएसपी के माध्यम से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
