जमीन किसी की, बंदोबस्ती किसी और के नाम

सीतामढ़ी : जमीन किसी की और बंदोबस्ती किसी और के नाम से करने के मामले में लोकायुक्त ने अगली तिथि को सुरसंड सीओ ओमप्रकाश को भी तलब किया है. यह मामला सहरसा जिला का है. वे कभी सहरसा में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी थे. इसी पद पर रहते हुए उनके द्वारा उक्त गड़बड़ी पकड़ी गयी थी. […]

सीतामढ़ी : जमीन किसी की और बंदोबस्ती किसी और के नाम से करने के मामले में लोकायुक्त ने अगली तिथि को सुरसंड सीओ ओमप्रकाश को भी तलब किया है. यह मामला सहरसा जिला का है. वे कभी सहरसा में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी थे.

इसी पद पर रहते हुए उनके द्वारा उक्त गड़बड़ी पकड़ी गयी थी. साथ ही गड़बड़ी को लेकर प्राथमिकी भी दर्ज करायी थी, जिसमें तत्कालीन सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी मो रियाजुद्दीन एवं पेशकार भूदेव दास को आरोपित किया गया था. पीड़ित सोहन साह नामक एक व्यक्ति ने मामले की शिकायत लोकायुक्त से की थी. विगत कई वर्षों से मामले की सुनवाई चल रही है.
हुआ था विभागीय कार्यवाही का आदेश
उक्त आरोपित अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त ने विभागीय कार्यवाही का आदेश दिया था. सहरसा के एडीएम को संचालन पदाधिकारी बनाया गया था, पर आरोप प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नामित नहीं किये जाने के कारण विभागीय कार्यवाही प्रारंभ नहीं हो सकी है. इस पर लोकायुक्त ने सहरसा एडीएम पर आरोपित ओमप्रकाश का बचाव करने की टिप्पणी की है. सहरसा डीएम पर भी कड़वी टिप्पणी की गयी है. लोकायुक्त ने कहा है, डीएम इस प्राधिकार को ‘पोस्ट ऑफिस’ समझ अपना प्रतिवेदन भेज देते रहे है.
लोकायुक्त की कड़वी टिप्पणी: लोकायुक्त ने टिप्पणी की है कि ‘डीएम व एसपी यह बात क्यों नहीं समझ रहे हैं कि यदि वाद को वर्षों तक लंबित रखा गया, तो आरोपित रिटायर हो जायेंगे और कोई सरकारी गवाह नहीं बच पायेगा. वाद के निबटारे के प्रति वहां के डीएम व एसपी के गंभीर नहीं रहने पर लोकायुक्त ने कहा है कि ‘बाध्य होकर उन्हें प्रतिवेदित करना होगा कि जीरो टॉलरेंस’ की नीति का पालन नहीं किया जा रहा है और जानबूझ कर प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से आरोपित को सहायता प्रदान की जा रही है.
अगली सुनवाई की तिथि को सुरसंड सीओ की उपस्थिति को लेकर लोकायुक्त ने डीएम को पत्र भेजा है.
सहरसा डीएम के प्रति नाराजगी
बताया गया है कि बंदोबस्ती संख्या- 21920/84 से संबंधित अभिलेख को लोकायुक्त ने पुलिस को जब्त करने का आदेश दिया था. केस के आइओ जीतेंद्र पांडेय ने वहां के डीएम को 20 मार्च 2017 को ही पत्र भेज अभिलेख जब्त करने की अनुमति मांगी थी, मगर सात दिसंबर 2017 तक उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी थी. नौ माह का लंबा समय बीत जाने के बाद भी अभिलेख जब्त नहीं किये जाने को लेकर लोकायुक्त ने टिप्पणी की है कि ‘सहरसा डीएम व एसपी द्वारा मामले में जान बूझकर कोताही बरती गयी है’.
डीएम को भेजा पत्र
लोकायुक्त ने सुरसंड सीओ ओमप्रकाश को किया तलब
सहरसा में थे सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी
सहरसा का है मामला, खफा
हैं लोकायुक्त
नहीं मिला है नोटिस
मामले की जानकारी है. खुद जांच कर इस मामले का खुलासा किया था और प्राथमिकी भी दर्ज करायी थी. नोटिस मिलने पर लोकायुक्त के यहां जायेंगे.
ओमप्रकाश, सीओ, सुरसंड

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