Sheikhpura News (अरियरी प्रखंड से प्रदीप कुमार की रिपोर्ट)
खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बरबीघा प्रखंड कार्यालय स्थित ई-किसान भवन में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर खेतों की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.
संतुलित उर्वरक उपयोग पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, शेखपुरा के वैज्ञानिक डॉ. अल्काज्योति शर्मा ने समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की जानकारी देते हुए कहा कि जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखता है. उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील की, ताकि खेतों की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सकें.
यूरिया के अधिक उपयोग से होने वाले नुकसान बताए
गृह विज्ञान वैज्ञानिक संगीता कुमारी ने किसानों को यूरिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा यूरिया का प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करता है और लंबे समय में फसल उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है. उन्होंने किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने और वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की सलाह दी.
योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की दी जानकारी
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने किसानों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी. साथ ही आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय भी बताए गए. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे और वैज्ञानिकों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया.
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