जिले में 93 हजार हेक्टेयर में होगी गेहूं की खेती

प्रखंडवार तय हुआ लक्ष्य बिहारशरीफ : नालंदा जिले में इस साल 93 हजार हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती की जायेगी. इसके लिए जिला कृषि विभाग की ओर से प्रखंडवार लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं. लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभाग ने रणनीति बनायी है. इस रणनीति के तहत आधार बनाकर जिले में रबी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

प्रखंडवार तय हुआ लक्ष्य

बिहारशरीफ : नालंदा जिले में इस साल 93 हजार हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती की जायेगी. इसके लिए जिला कृषि विभाग की ओर से प्रखंडवार लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं. लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभाग ने रणनीति बनायी है. इस रणनीति के तहत आधार बनाकर जिले में रबी फसलों की खेती की जायेगी. स्थानीय टाउन हॉल में बुधवार को जिला कृषि विभाग की ओर से आयोजित रबी महाभियान सह महोत्सव 2016 में जिला स्तरीय कर्मशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह बातें जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार ने कहीं. जिले में कृषि को बढ़ावा देने के लिए जिला कृषि विभाग की ओर से कई महत्वकांक्षी योजनाएं चलायी जा रही है.
रबी के लिए कुल दस विकास परक योजनाएं संचालित हो रही हैं. इन योजनाओं का सही रूप से क्रियान्वयन करने के लिए रणनीति बनायी गयी है. इस रणनीति के तहत काम किया जायेगा और कृषि विकास परक योजनाओं से किसानों को लाभांवित किया जायेगा.
रबी की खेती के लिए अनुदान पर मिलेंगे बीज
जिले में रबी की उन्नत खेती करने के लिए किसानों को अच्छी किस्म के गेहूं बीज उपलब्ध कराये जाएंगे. इन बीजों पर सरकार के मापदंडों के मुताबिक अनुदान की राशि भी उपलब्ध करायी जाएगी. अनुदान राशि किसानों के बैंक खातों पर भेज दिये जाएंगे. ताकी किसानों को समय पर अनुदान का लाभ मिल सके. डीएओ श्री कुमार ने कहा कि किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं. किसानों के उत्थान से ही अर्थव्यवस्था को मजबूत बनायी जा सकती है. जिले में इस बार 93 हजार हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती करने का लक्ष्य तय किया गया है.
लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है.बीज अनुदान के तहत किसानों को दस रुपये प्रति किलो के हिसाब से अनुदान पर गेहूं के बीज उपलब्ध कराये जाएंगे. इसी तरह मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना के तहत 90 फीसदी अनुदान तथा बीजोग्राम योजना के तहत 50 फीसदी अनुदान दर पर गेहूं बीज किसानों को उपलब्ध कराये जाएंगे.
32 हजार मिट्टी के नमूने की होगी जांच
डीएओ ने बताया कि खेती की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने के लिए भी मिट्टी जांच जरूरी है.इस साल 32 हजार मिट्टी के नमूने संग्रह कर इसकी जांच की जाएगी. उन्होंने इस कार्य के लिए गठित टीम के सदस्यों को निर्देश दिया कि लक्ष्य के अनुरूप मिट्टी के नमूने लेकर मिट्टी जांच प्रयोगशाला में भेजें ताकी मिट्टी की उर्वरा शक्ति की सही रूप से पता चल सके. मिट्टी जांच कर किसानों को स्वास्थ्य हेल्थ कार्ड समय पर उपलब्ध कराया जा सके.इसके अलावा विभिन्न योजनाओं की जानकारी उन्होंने दी. आत्मा के परियोजना निदेशक मो.इस्माइल ने कहा कि मिट्टी जांच के लिए नमूने लेने में कोताही नहीं बरतें.
किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र पर उपलब्ध कराये जाएंगे.इसके लिए दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेला का आयोजन 27-28 अक्टूबर को लगाये जाएंगे. हालांकि इस बार ट्रैक्टर क्रय पर अनुदान नहीं मिल पायेगा. लोग जीरो टिलेज मशीन से गेहूं की बुआई व खेतों की जुताई करें. इससे किसानों को एक तो लागत कम आती है और फसलों की पैदावार अधिक होती है. हरनौत कृषि विज्ञान केन्द्र व नूरसराय उद्यान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के बारे में किसानों को जानकारी दी. डॉ. मनीष दत्त ओझा व डॉ. संतोष कुमार चौधरी ने गेहूं की उन्नत खेती के बारे में जानकारी दी.
डॉ.बीके सिंह ने जीरो टिलेज मशीन से गेहूं की खेती करना लाभदायक है. जिला नोडल पदाधिकारी संतोष कुमार उत्तम ने योजनाओं की जानकारी दी. अग्रणी बैंक प्रबंधक अरुण कुमार चौधरी ने किसानों से कहा कि अपने र्बैक खातों को आधार से जुड़वायें. योजना का लाभ राशि खाते में ही दी जाएगी. इस मौके पर तकनीकी पदाधिकारी धनंजय कुमार ने भी कृषि योजनाओं की जानकारी लोगों को दी.
कर्मशाला में सभी बीएओ,कृषि समन्वयक,किसान सलाहकार आदि मौजूद थे.
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