Sheohar News: बिहार का सबसे छोटा जिला शिवहर क्षेत्रफल में भले ही लघु हो, लेकिन इसका पौराणिक और धार्मिक इतिहास बेहद विशाल है. माना जाता है कि यह स्थली भगवान शिव और हरि (विष्णु) के मिलन की भूमि है, जिसके कारण इसका नाम ‘शिवहर’ पड़ा. इस क्षेत्र का संबंध रामायण और महाभारत काल से भी रहा है. जनश्रुतियों के अनुसार, प्रसिद्ध देकुली धाम वही स्थल है जहाँ राजा द्रुपद के हवन कुंड से द्रौपदी का जन्म हुआ था. वर्ष 1962 में संत प्रेम भिक्षु द्वारा कराई गई खुदाई में यहाँ कई प्राचीन मूर्तियाँ भी मिली थीं.
परशुराम के कोप और मोहभंग की गाथा
रामायण काल से जुड़े कई स्थल आज भी शिवहर में मौजूद हैं. माता सीता से विवाह के बाद जब भगवान श्री राम को महर्षि परशुराम के क्रोध का सामना करना पड़ा था, वह स्थान आज ‘कोपगढ़’ गांव के रूप में विख्यात है. वहीं, जिस स्थान पर महर्षि परशुराम का क्रोध शांत हुआ और उनका मोह भंग हुआ, वह आज ‘मोहारी’ गांव के नाम से जाना जाता है.
स्वतंत्रता संग्राम में ‘जलियांवाला बाग’ जैसा बलिदान
प्राचीन काल में वैशाली गणराज्य का हिस्सा रहे शिवहर का आजादी के आंदोलन में भी स्वर्णिम इतिहास रहा है. ठाकुर नवाब सिंह समेत सैकड़ों वीरों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान तरियानी छपरा में अंग्रेजों की अंधाधुंध फायरिंग में 11 देशभक्त शहीद हुए थे, जिसकी तुलना जलियांवाला बाग हत्याकांड से की जाती है. इसके अलावा शिवहर थाने पर तिरंगा फहराते समय भी 5 सपूत शहीद हुए थे. आजादी के बाद यह क्षेत्र समाजवाद का गढ़ बना और यहाँ की बेटी रामदुलारी सिन्हा केरल की राज्यपाल बनीं.
