राजकीय डिग्री कॉलेज में 5 स्मार्ट क्लास का ओरियंटेशन, ICSSR रिसर्च प्रोजेक्ट पर शिक्षकों को मिली जानकारी

राजकीय डिग्री महाविद्यालय, शिवहर में नवनिर्मित पांच स्मार्ट वर्गों के प्रभावी संचालन के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया. इस दौरान उन्हें स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी गई. साथ ही, ICSSR शोध परियोजनाओं पर भी विशेष गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें शोध प्रस्ताव तैयार करने और ऑनलाइन प्रस्तुत करने की प्रक्रिया समझाई गई.

Sheohar News: राजकीय डिग्री महाविद्यालय, शिवहर में नवनिर्मित पांच स्मार्ट वर्गों के प्रभावी एवं सुचारु संचालन को लेकर बुधवार को विशेष ओरियंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में शिक्षकों को स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल संसाधनों के शैक्षणिक उपयोग की जानकारी दी गयी. इसके साथ ही भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) की शोध परियोजनाओं को लेकर भी विशेष गोष्ठी आयोजित कर शिक्षकों को शोध प्रस्ताव तैयार करने और ऑनलाइन प्रस्तुत करने से संबंधित जानकारी दी गयी.

5 स्मार्ट क्लास के संचालन को लेकर शिक्षकों को मिली जानकारी

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है. स्मार्ट कक्षाएं विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं.

उन्होंने शिक्षकों से स्मार्ट बोर्ड और उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की अपील की, ताकि कक्षाओं को अधिक संवादात्मक, रोचक और ज्ञानवर्धक बनाया जा सके.

स्मार्ट बोर्ड का दिया गया प्रैक्टिकल डेमो

कार्यक्रम में गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार मंडल ने डेमोंस्ट्रेटर के रूप में स्मार्ट बोर्ड का व्यावहारिक प्रदर्शन किया.

उन्होंने स्मार्ट बोर्ड के विभिन्न फीचर्स, डिजिटल कंटेंट के प्रदर्शन, बोर्ड पर लेखन, चित्र एवं वीडियो के उपयोग और विषय-वस्तु को विद्यार्थियों के सामने सरल एवं आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया समझायी.

उन्होंने बताया कि स्मार्ट कक्षा के माध्यम से पारंपरिक शिक्षण पद्धति को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़कर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है.

ICSSR शोध परियोजनाओं पर हुई विशेष गोष्ठी

ओरियंटेशन कार्यक्रम के साथ ही महाविद्यालय में ICSSR शोध परियोजनाओं को लेकर विशेष गोष्ठी आयोजित की गयी. प्राचार्य डॉ. अजय कुमार ने बताया कि बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद के माध्यम से ICSSR के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मेजर एवं माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार कर निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाना है.

उन्होंने शिक्षकों को शोध परियोजना के विषय चयन, शोध समस्या, उद्देश्य, शोध-पद्धति, नमूना चयन, आंकड़ों के संकलन एवं विश्लेषण, अपेक्षित परिणाम और बजट समेत विभिन्न बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करने का निर्देश दिया.

शोध अनुदान और परियोजना के खर्च पर भी चर्चा

गोष्ठी में ICSSR से मिलने वाले शोध अनुदान की उपयोगिता और निर्धारित मदों में राशि के नियमानुसार उपयोग पर भी चर्चा हुई. फील्ड वर्क, डाटा संग्रह, शोध सामग्री, यात्रा, शोध सहायक तथा अन्य अनुमन्य गतिविधियों से संबंधित जानकारी शिक्षकों को दी गयी.

शिक्षकों को बताया गया कि शोध परियोजना तैयार करते समय ICSSR के दिशा-निर्देशों और वित्तीय नियमों का पालन करना आवश्यक है.

स्थानीय समस्याओं पर शोध करने का दिया गया सुझाव

प्राचार्य ने शिक्षकों से अपनी रुचि और विषय-विशेषज्ञता के अनुरूप मेजर या माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा. उन्होंने कहा कि शोध परियोजनाओं के माध्यम से स्थानीय और क्षेत्रीय सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सकता है.

इससे महाविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध का वातावरण विकसित होने के साथ स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में भी योगदान मिलेगा.

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लेखक के बारे में

By मनीष नंदन सिंह

मनीष नंदन सिंह बीते 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. इनका जनहित से जुड़ी खबरों से गहरा जुड़ाव है और ये स्थानीय व क्षेत्रीय स्तर की खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं. मनीष जन-सरोकार के मुद्दों की सटीक और जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं.

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