शिवहर : पंडित रघुनाथ झा के 25 वर्षीय संसदीय जीवन के सफलता के बाद शिवहर में रजत जयंती समारोह मनाया गया था. उस दौरान 25 वर्ष के अविराम संसदीय जीवन की पूर्णता पर रघुनाथ झा अभिनंदन ग्रंथ में पूर्व मंत्री मुनेश्वर प्रसाद सिंह ने लिखा है कि रघुनाथ झा समाजवादी आंदोलन के उपज थे. उनका संसदीय कार्यकलाप 1972 से प्रारंभ हुआ. जब वे कांग्रेस की टिकट पर विधान सभा सदस्य के रूप में चुन कर आये. किंतु युवा काल 1957 से प्रज्ञा सोशलिस्ट पार्टी के युवा फ्रंट पर कार्य करना शुरू करना शुरू किया. उनकी राजनीतिक शिक्षा दीक्षा समाजवादी आंदोलन के दौरान हुई. जिसका अमिट छाप उनके राजनीतिक जीवन पर था.
समाजवादी आंदोलन की उपज थे पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुनाथ झा
शिवहर : पंडित रघुनाथ झा के 25 वर्षीय संसदीय जीवन के सफलता के बाद शिवहर में रजत जयंती समारोह मनाया गया था. उस दौरान 25 वर्ष के अविराम संसदीय जीवन की पूर्णता पर रघुनाथ झा अभिनंदन ग्रंथ में पूर्व मंत्री मुनेश्वर प्रसाद सिंह ने लिखा है कि रघुनाथ झा समाजवादी आंदोलन के उपज थे. उनका […]

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपने कलम से लिखे संदेश में लिखा है कि पंडित रघुनाथ झा को मैं विद्यार्थी जीवन से जानता हूं. उनमें राष्ट्र प्रेम की अटूट भावना है. जिसमें समाज सेवा की संकल्प शक्ति है व उस प्रयास में लोगों को जोड़ने की अपूर्व क्षमता. राजनीति के दिनों से यह गुण उनमें सदा विकसित होते रहे. राजनीति उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने अापसी संबंधों को प्रभावित नहीं होने दिया. राजनीति में दृढ़ता से चलने के साथ विरोधियों से भी महत्वपूर्ण व्यवहार बनाये रखना कोई रघुनाथ से सीखे.
पूर्व प्रधान मंत्री का रघुनाथ के प्रति कहा गया यह संदेश स्वर्गीय झा के सरल व सहज व्यक्तित्व को रेखांकित करता है. जिसमें जहां राष्ट्रभक्ति थी. तो जननी जन्मभूमि से अटूट प्रेम था. शिवहर के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. शिवहर को अनुमंडल से जिला बना कर उन्होंने शिवहर के निरंतर विकास का रास्ता साफ कर दिया. शिक्षा के क्षेत्र में कलावती जियालाल उच्च विद्यालय अंबा कला की स्थापना,सीतामढ़ी में रघुनाथ झा कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय के शिवहर के अंबा कला उच्च विद्यालय में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत संचालित करना उनके शिक्षा के प्रति झुकाव को दर्शाता है. बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष राधानंदन झा ने पुस्तक में उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि अपनी कार्यकुशलता, लोक निष्ठा, विचारगत उच्चता व लगन के बल पर शिवहर के माटी के अभिन्न अंग बन गये.