शिवहर : सात अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक हुई. इस दौरान स्वराज प्राप्ति के लिए अहिंसात्मक आंदोलन प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया.
सदस्यों को अागाह किया गया कि नौ अगस्त को बापू के आदेश की प्रतीक्षा करें. इसी बीच नौ अगस्त की सुबह करीब 5:30 बजे गांधी जी गिरफ्तार कर लिये गये. किंतु गांधी जी ने करो या मरो का संदेश छोड़ दिया. इसी बीच शिवहर-सीतामढ़ी के कांग्रेस के प्राण जिले के महुअरिया निवासी ठाकुर रामनंदन सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व ठाकुर नबाव सिंह करने लगे. आंदोलन को तीव्र करने के लिए हर थाना क्षेत्र में सभा व जुलूस का आयोजन किया जाने लगा. इसी बीच 12 अगस्त 1942 को पटना में सचिवालय पर झंडा फहराने के दौरान सात जवान शहीद हो गये. उसके बाद शिवहर में आंदोलन उग्र हो गया.शिवहर थान क्षेत्र में स्वतंत्रता सेनानियों ने तोड़फोड़ का कार्य शुरू कर दिया. सभी पुल तोड़ दिये गये. शिवहर से परसौनी तक बिजली व टेलीफोन के तार का नामोनिशान नहीं था.
इसी बीच शिवहर व सीतामढ़ी के स्वतंत्रता सेनानियों ने पुपरी थाना के दारोगा को खदेड़ दिया. इस दौरान जनता थाना का भार स्वतंत्रता सेनानी नंद किशोर सिंह ने संभाल लिया. बौखलाई अंग्रेजी हुकूमत ने 24 अगस्त से दमनात्मक कार्रवाई शुरू किया. मुजप्फरपुर से एडीएम बॅन गोरो पुलिस के साथ सीतामढ़ी आ धमका. उसके कांग्रेस कमेटी का दफ्तर, ठाकुर रामनंदन सिंह, मोहन सिंह व बाबा नरहरि दास का आवास फूंक दिया. 30 अगस्त को शिवहर जिला के तरियानी छपड़ा गांव में अग्रेजों की गोली से दस स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गये. रामदेव सिंह, श्यामनंदन सिंह का घर लूट लिया गया. औरा प्रदीप नारायण सिंह, पचड़ा मुसाफिर सिंह के घर पर लूटपाट की.
