शिवहर : विभागीय अनदेखी के कारण जिले के गैर ऋणी किसान फसल बीमा के लाभ से वंचित रह गये हैं. जिससे किसानों में झोभ व्याप्त है. प्रगतिशील किसान रामपुरकेशो निवासी महबूब आलम का कहना है कि कॉपरेटिव बैंक के उदासीनता के कारण व विभागीय अनदेखी के कारण प्रत्येक वर्ष जिले के गैर ऋणी किसान फसल बीमा से वंचित रह जाते हैं.
गैर ऋणी किसान बीमा से रह गये वंचित
शिवहर : विभागीय अनदेखी के कारण जिले के गैर ऋणी किसान फसल बीमा के लाभ से वंचित रह गये हैं. जिससे किसानों में झोभ व्याप्त है. प्रगतिशील किसान रामपुरकेशो निवासी महबूब आलम का कहना है कि कॉपरेटिव बैंक के उदासीनता के कारण व विभागीय अनदेखी के कारण प्रत्येक वर्ष जिले के गैर ऋणी किसान फसल […]

पिछले वर्ष भी बहुत से गैरऋणी किसान फसल बीमा कराने व उसके लाभ से वंचित रह गये थे. इधर भाजपा के मिडिया प्रभारी विनय कुमार सिंह का कहना है कि प्रत्येक वर्ष एक दो दिन ही बीमा के लिए निर्धारित की जाती है. जिसमें एलपीसी को अनिवार्यता रहती है. जबकि सीओ के शिथिल कार्यशैली के कारण किसान के लिए दो दिनों के अंदर में एलपीसी बनवाकर बीमा करवाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में वे बीमा से वंचित रह जाते हैं. पिछले वर्ष भी बहुत से किसान बीमा से वंचित रह गये.
कहा कि इस पूरे मामले में प्रशासनिक व्यवस्था व कॉपरेटिव बैंक प्रबंधन के कार्यशैली सावल के घेरे में है. जागरूकता व सूचनाओं के प्रसार के अभाव में बहुत से किसान बीमा की निर्धारित तिथि को भी नहीं जान पाते हैं. जिसके कारण कुछ विशेष लोगों का ही फसल बीमा हो पाता है. अधिकतर गैर ऋणी किसान इसके लाभ से वंचित रह जाते हैं. उन्होंने डीएम से गैर ऋणी किसानों के फसल बीमा के लिए तिथि बढ़ाने की मांग की है.
नयागांव फैक्स अध्यक्ष कामोद कुमार ने कहा कि उन्हें भी बीमा की निर्धारित तिथि की जानकारी नहीं मिल सकी थी. अब सवाल है कि प्रत्येक वर्ष गैरऋणी किसान फसल बीमा कराने से वंचित रह जाते हैं. कभी पता चलता है कि जानकारी नहीं मिली. तो कभी एलपीसी नहीं उपलब्ध नहीं रहना कारण बताया जाता है. ऐसे में कृषि सलाहकार व अन्य माध्यम से किसानों को संबंधित एजेंसी सूचनाएं उपलब्ध करा पाती है. इसके जवाब में अधिकतर किसान नहीं शब्द का ही प्रयोग करते हैं. कॉपरेटिव बैंक शाखा शिवहर के प्रबंधक कृष्ण कुमार सिंह का कहना है कि 29 एवं 31 जुलाई को चोला मंडलम कंपनी द्वारा बीमा किया गया. जिसमें 182 ऋणी किसानों का बीमा किया गया है. जबकि गैर ऋणी किसान की स्थिति शून्य रही. इसके कारण के बाबत बताते हैं कि ऑनलाइन एलपीसी करेंट देना अनिवार्य है. जिसे किसान उपलब्ध नहीं करा पाये. जिससे वे बीमा से वंचित रह गये. कहा कि पिछले वर्ष एसबीआइ द्वारा बीमा किया गया था. बीमा की तिथि बढ़ायी गयी थी. जिसके कारण करीब तीन सौ गैर ऋणी किसान का बीमा संभव हो सका था.