पुपरी : नानपुर स्टेट की जमीन में अंग्रेजों के जमाने में बने कुआं से जलभर कर बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है. बुजुर्गों का कहना है कि दशकों से श्रद्धालु इसी कुआं से जल लेकर बाबा नागेश्वर नाथ पर जलाभिषेक करते थे. अब कुछ लोग चापाकल से भी जल लेकर […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
पुपरी : नानपुर स्टेट की जमीन में अंग्रेजों के जमाने में बने कुआं से जलभर कर बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है. बुजुर्गों का कहना है कि दशकों से श्रद्धालु इसी कुआं से जल लेकर बाबा नागेश्वर नाथ पर जलाभिषेक करते थे. अब कुछ लोग चापाकल से भी जल लेकर अभिषेक कर लेते हैं. बता दें कि पुपरी शहर में दशकों पूर्व करीब आधा दर्जन कुआं हुआ करता था, पर इसकी अहमियत लोग कम समझने लगे हैं.
यह कारण है कि अब जिस गांव में कुआं शेष है, वहां लोग कूड़ेदान के रूप में उसका उपयोग कर रहे हैं.
मंदिर से 100 गज की दूरी पर है कुआं : स्थानीय नागेश्वर स्थान मंदिर से 100 गज की दूरी पर अवस्थित कुआं के बारे में मिथिलेश कुमार कर्ण बताते हैं कि कुआं के आसपास की सारी भूमि 30 के दशक से ही इलाहाबाद कायस्थ पाठशाला की है. करीब वर्ष 1930 में यहां अंग्रेजों द्वारा पुलिस थाना बनाया गया था. बाद में पुलिस वालों व राहगीरों को पानी पीने के उद्देश्य से यह कुआं खुदवाया गया. वर्ष 1932 में जोरों का भूकंप आया, जिसमें थाने का भवन ध्वस्त हो गया. लेकिन कुआं बच गया. उसी समय से उक्त कुआं की महत्ता बढ़ गयी. लोगों के दिलो-दिमाग में यह बात बैठ गया कि भगवान शिव के कृपा से ही कुआं को कुछ नहीं हुआ है. माना जाता है कि वर्ष 1968 में पृथ्वी के गर्भ से शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी. धीरे-धीरे स्थानीय स्थानीय भक्तों ने चंदा एकत्रित कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया, जहां सावन के अलावे वर्षभर जलाभिषेक को श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है.