Sasaram News : प्रसूता की मौत पर दो एफआइआर दर्ज, स्वास्थ्य विभाग कटघरे में

प्रसूता की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.

काराकाट़ प्रसूता की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. जयश्री गांव निवासी विनोद प्रसाद की पत्नी 26 वर्षीय संगीता देवी की मौत गोड़ारी स्थित जनता नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से सात जुलाई को हो गयी थी. मौत के बाद काफी हंगामा हुआ था. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया था. उसी दिन देर शाम सीएस काराकाट सीएचसी पहुंच कर स्वास्थ्य विभाग की टीम व पुलिस बल के साथ क्लिनिक पर छापेमारी की थी. छापेमारी में डॉक्टर क्लिनिक में ताला बंद कर फरार हो गया था. आठ जुलाई को सीएचसी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने अवैध संचालित होने वाले जनता नर्सिंग होम पर प्राथमिकी दर्ज करायी. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ सीएचसी प्रभारी डॉ राजीव कुमार, बीडीओ राहुल कुमार सिंह, स्वास्थ्य प्रबंधक कौशलेंद्र शर्मा के साथ पुलिस बल के साथ थानाध्यक्ष भागीरथ कुमार ने जनता नर्सिंग होम को सील किया. मृतका के पति विनोद प्रसाद हैदराबाद से गांव वापस होने के बाद जनता नर्सिंग होम के डॉक्टर राजदेव कुमार सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. परिजनों ने आशा पर लगाया भर्ती कराने का आरोप प्रसूता की मौत ने पूरे स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है. लेकिन दुःख की इस घड़ी में जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी तय करने के बजाय अब एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. अब सवाल यह है कि जब अधिकारियों को पहले से फर्जी अस्पताल की जानकारी थी, तो कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? क्या एक महिला की जान जाने के बाद भी जिम्मेदार सिर्फ एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहेंगे. इस मामले में आशा कार्यकर्ता की भूमिका भी सवालों में है. परिवार वालों का आरोप है कि आशा कार्यकर्ता ने महिला को सरकारी अस्पताल से निकालकर निजी क्लिनिक में भर्ती कराया, जहां इलाज में लापरवाही से महिला की मौत हो गयी. क्या कहते हैं सीएचसी प्रभारी डॉ राजीव कुमार का कहना है कि जिस निजी अस्पताल में महिला की मौत हुई है, उस पर उन्होंने पहले भी कई बार जांच की थी और रिपोर्ट भी जिला कार्यालय को भेज दी थी. उनका कहना है कि उस क्लिनिक के नाम पर जो डॉक्टर पंजीकृत है, वह कभी भी मौके पर नहीं मिला. डॉ राजीव कुमार सवाल उठाते हैं कि अगर रिपोर्ट भेजी गयी थी, तो फिर जिला स्तर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? क्या कहते हैं सीएस – सिविल सर्जन डॉ मणिराज रंजन का बयान इससे बिल्कुल अलग है. उनका कहना है कि सीएचसी प्रभारी झूठ बोल रहे हैं और अब उन पर भी करवाई होगी. सिविल सर्जन का आरोप है कि 2024 में ही जिलाधिकारी के आदेश पर काराकाट सीएचसी प्रभारी, थाना प्रभारी और अंचलाधिकारी को फर्जी अस्पतालों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गयी थी. लेकिन अब तक काराकाट में कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो लापरवाही नहीं, बल्कि मिलीभगत का मामला है. सिविल सर्जन ने सीधे सीएचसी प्रभारी पर अवैध गतिविधि में शामिल होने के आरोप लगाये हैं. सिविल सर्जन ने यह भी कहा कि आदेश के अनुसार, फर्जी अस्पतालों पर छापेमारी का काम स्थानीय अधिकारियों को ही करना था. जिला टीम को केवल खास मामलों में जाना होता है. लेकिन अब कई प्रभारी खुद को डरे हुए महसूस करते हैं, इसलिए कार्रवाई नहीं करते. क्या कहते हैं थानाध्यक्ष – काराकाट थानाध्यक्ष भागीरथ कुमार ने कहा कि घटना के बाद शव को पोस्टमार्टम करा दिया गया था. सीएचसी ने जनता क्लिनिक पर प्राथमिकी दर्ज करायी है. मृतका के पति विनोद प्रसाद ने अवैध क्लिनिक के डॉक्टर राजदेव कुमार सिंह पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. अब आगे की कारवाई की जायेगी.

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