रोहतास में बढ़ा फॉरेस्ट एरिया, वन विभाग का दावा

Sasaram News: रोहतास वन प्रमंडल ने नवीनतम सरकारी आंकड़ों के हवाले से जिले के फॉरेस्ट कवर में वृद्धि होने का दावा किया है. विभाग के अनुसार पिछले तीन वर्षों में विभिन्न योजनाओं के तहत 16 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं.

Sasaram News: विश्व पर्यावरण दिवस (World Enviroment Day) के विशेष अवसर पर रोहतास वन प्रमंडल, सासाराम ने जिले की वन एवं पर्यावरणीय स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है. वन विभाग का आधिकारिक दावा है कि नवीनतम आंकड़ों के अनुसार रोहतास जिले में फॉरेस्ट कवर में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है. इसके साथ ही क्षेत्र में वन संरक्षण, वनीकरण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं. वन प्रमंडल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 में रोहतास जिले में लगभग 669.9 वर्ग किलोमीटर फॉरेस्ट कवर दर्ज किया गया है.

कैमूर लैंडस्केप का है हिस्सा

विभाग का कहना है कि वर्ष 2021 के आकलन की तुलना में वर्ष 2023 में जिले के फॉरेस्ट कवर में लगभग 1.66 वर्ग किलोमीटर की सकारात्मक वृद्धि हुई है. रोहतास बिहार के सर्वाधिक वनाच्छादित जिलों में शामिल है और कैमूर फॉरेस्ट लैंडस्केप का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि फॉरेस्ट एरिया, फॉरेस्ट कवर, ट्री कवर और नेचुरल फॉरेस्ट अलग-अलग अवधारणाएं हैं तथा इनके आकलन की प्रक्रिया भी पूरी तरह भिन्न होती है. विभाग के अनुसार जिले के हरित आवरण का मूल्यांकन करते समय कृषि वानिकी, बाग-बगीचों, सड़क किनारे वृक्षारोपण और वन क्षेत्रों के बाहर मौजूद वृक्षों के योगदान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

वनों का है पारिस्थितिक महत्व

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि रोहतास के जंगल मुख्य रूप से साल प्रधान शुष्क पतझड़ी वन हैं, जिनका पारिस्थितिक महत्व काफी अधिक है. ये वन जैव विविधता संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण, मृदा संरक्षण और जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वनाग्नि की चुनौती को स्वीकार करते हुए विभाग ने बताया कि जिले में आग की घटनाओं की निगरानी और नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की गई है. फायर सीजन के दौरान सब-बीट स्तर तक फॉरेस्ट फायर पेट्रोलिंग टीमों का गठन किया जाता है तथा सैटेलाइट आधारित अलर्ट की लगातार निगरानी की जाती है.

तीन वर्षों में लाखों पौधे रोपे

विभाग के अनुसार फायर लाइन के अनुरक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से भी वनाग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है. वन विभाग के मुताबिक पिछले तीन वर्षों के दौरान रोहतास जिले में विभिन्न वनीकरण एवं पारिस्थितिक पुनर्स्थापन कार्यक्रमों के तहत लगभग 16 लाख पौधों का रोपण किया गया है. इसमें क्षतिग्रस्त वन भूमि, सड़क किनारे, संस्थागत परिसरों तथा नदी तटीय क्षेत्रों में पौधारोपण शामिल है. इसके अतिरिक्त असिस्टेड नेचुरल रिजनरेशन, मृदा एवं नमी संरक्षण तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं.

विदेशी प्रजातियों से है बड़ी चुनौती

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि लैंटाना कैमारा जैसी आक्रामक विदेशी प्रजातियां वन प्रबंधन के लिए चुनौती बनी हुई हैं, लेकिन इनके नियंत्रण के लिए नियमित प्रबंधन एवं संरक्षणात्मक गतिविधियां चलाई जा रही हैं. वन प्रमंडल का कहना है कि रोहतास बिहार के महत्वपूर्ण वन परिदृश्यों में से एक है और जिले में वन संरक्षण तथा हरित आवरण बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं. विभाग ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने और वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया है.

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Author: Prabhat Khabar Digital Desk

Published by: Vikas Jha

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