Rohtas News(प्रमोद कुमार श्रीवास्तव): रोहतास जिले के संझौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम तीलई स्थित महादलित मुसहर टोली से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर मामला प्रकाश में आया है. रविवार को संझौली थाना अध्यक्ष के नेतृत्व में पहुंची पुलिस बल द्वारा महादलितों के साथ कथित रूप से बर्बरतापूर्वक मारपीट किए जाने का आरोप लगा है. इस घटना में कई महिलाएं और पुरुष गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए सासाराम सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त हो गया है और पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश सुलग उठा है.
बेंत और राइफल के कुंदों से बेरहमी से पीटने का आरोप, सदर अस्पताल में मची चीख-पुकार
घटना की सूचना मिलते ही भाकपा माले (CPIML) के कद्दावर नेता अशोक बैठा तुरंत घायलों का हालचाल जानने और उनका पक्ष सुनने सासाराम सदर अस्पताल पहुंचे. अस्पताल में भर्ती पीड़ितों ने मीडिया और नेताओं के सामने पुलिसिया कार्रवाई के दौरान टूटे हुए बेंत (लाठियां) दिखाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके परिजनों को जानवरों की तरह पीटा है. पीड़ितों का आरोप है कि संझौली पुलिस ने पुरुषों के साथ-साथ घर में मौजूद महिलाओं को भी दौड़ा-दौड़ा कर लाठियों और राइफल के कुंदों से बेरहमी से निशाना बनाया. इस खूनी झड़प में तेतरी कुमारी, धनजी मुसहर, शिवकुमारी देवी, प्रमिला देवी, दूजी देवी, काजल देवी, लीलावती देवी और अतवारी कुंवर सहित कई लोग लहूलुहान होकर जख्मी हुए हैं.
2 महीने पुराने SC-ST केस का विवाद: “दबंगों के दबाव में पुलिस ने रची साजिश”
माले नेता अशोक बैठा ने स्थानीय पुलिस पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले गांव के ही कुछ रसूखदार और दबंग लोगों द्वारा मुसहर समुदाय के लोगों के साथ मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज, और उनका रास्ता व पानी निकासी रोकने की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया था. इस संबंध में अनुसूचित जाति एवं जनजाति थाना (डेहरी) में कांड संख्या 17/2026 के तहत बाकायदा प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. आरोप है कि इस केस के नामजद अभियुक्त लगातार महादलित परिवार पर केस उठाने और समझौते के लिए जान से मारने की धमकी और दबाव दे रहे थे. डेहरी थाने में केस दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने अभियुक्तों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, बल्कि रविवार को संझौली पुलिस ने दबंगों के इशारे पर उल्टा पीड़ितों पर ही लाठियां चटका दीं.
शराब छापेमारी का था मामला, पुलिस ने आरोपों को किया खारिज
इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे और आरोपों पर संझौली पुलिस ने भी अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है. पुलिस के अनुसार, तीलई मुसहर टोला में अवैध देसी/विदेशी शराब के निर्माण और धड़ल्ले से बिक्री होने की गुप्त सूचना मिली थी. इसी इनपुट के आधार पर संझौली थाने की एक विशेष टीम छापेमारी और जांच के लिए गांव पहुंची थी.
पुलिस का दावा है कि जैसे ही टीम ने तलाशी शुरू की, टोले के दर्जनों लोगों ने पुलिस टीम को घेर लिया और छापेमारी का विरोध करते हुए उन पर जानलेवा हमला व झड़प शुरू कर दी. इस हिंसक झड़प में पुलिस टीम के सब इंस्पेक्टर (SI) अशोक कुमार गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं. पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आत्मरक्षार्थ और स्थिति को काबू में करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया था, बाकी पूरे मामले की बारीकी से कानूनी जांच की जा रही है.
SP से लेकर DGP तक पहुंचा मामला, दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने की मांग
भाकपा माले नेता अशोक बैठा ने इस पूरी घटना को अमानवीय बताते हुए रोहतास के पुलिस अधीक्षक (SP), शाहाबाद प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) और बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखित आवेदन पत्र भेजा है. उन्होंने मांग की है कि संझौली थाना अध्यक्ष को तुरंत प्रभाव से पद से हटाया जाए, दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए और इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष उच्च अधिकारी से जांच कराकर महादलितों को न्याय दिया जाए. माले ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर दोषी पुलिसवालों पर गाज नहीं गिरी, तो पूरी पार्टी दलित और शोषित समुदाय के लोगों को संगठित कर जिले भर में उग्र चक्का जाम, धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी.
दोषियों पर गिरेगी गाज या पुलिस पर हमला था सच? रोहतास एसपी रौशन कुमार ने संभाली कमान
संझौली के तीलई मुसहर टोले में हुए इस भारी बवाल और लाठीचार्ज के गंभीर आरोपों के बाद रोहतास जिला पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते राजनीतिक तनाव को देखते हुए रोहतास एसपी रौशन कुमार ने खुद इस पूरे मामले में दखल दिया है. एसपी ने साफ कर दिया है कि इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद की निष्पक्ष और गहन जांच की जिम्मेदारी एसडीपीओ (SDPO) विक्रम जंग को सौंप दी गई है.
एसपी रौशन कुमार ने कहा कि मुसहर टोले की घटना और पुलिस बल पर हुए हमले के दोनों पक्षों के दावों को गंभीरता से लिया गया है. एसडीपीओ विक्रम जंग को मामले की ऑन-ग्राउंड जांच की जिम्मेदारी दी गई है. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरा मामला पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा और जो भी पक्ष दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
एसडीपीओ विक्रम जंग को जांच सौंपे जाने के बाद अब संझौली पुलिस और स्थानीय दबंगों के साथ-साथ आंदोलन की चेतावनी दे रहे भाकपा माले कार्यकर्ताओं की नजरें भी जांच रिपोर्ट पर टिक गई हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि एसडीपीओ की टीम जल्द ही तीलई गांव पहुंचकर पीड़ित महिलाओं, घायल एसआई अशोक कुमार और स्थानीय चश्मदीदों के बयान दर्ज कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
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