रोहतास: नोखा में पंचायत सरकार भवन का सपना अधूरा, 13 में सिर्फ 6 पंचायतों को मिली सुविधा

Rohtas News: रोहतास जिले के नोखा प्रखंड की 13 में से सात पंचायतें अब भी पंचायत सरकार भवन से वंचित हैं. भवन नहीं होने और जहां बने हैं वहां कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ रहा है.

Rohtas News: रोहतास जिले में पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे तमाम सरकारी सुविधाएं मुहैया कराने का दावा नोखा प्रखंड में पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहा है. दरअसल, प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं के ऑन-स्पॉट निबटारे के उद्देश्य से सरकार ने हर पंचायत में ‘पंचायत सरकार भवन’ बनाने का निर्देश दिया था. इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह था कि ग्रामीणों को जाति, आवासीय, आय प्रमाणपत्र या अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रखंड कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े. हालांकि, सरकारी उदासीनता के कारण नोखा प्रखंड की अधिकांश पंचायतों में यह योजना अब भी अधूरी है. स्थिति यह है कि 13 पंचायतों वाले इस प्रखंड में निर्देश जारी होने के 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी मात्र 6 पंचायतों में ही भवन का निर्माण हो सका है, जबकि शेष सात पंचायतों के लोग अब भी इसके इंतजार में हैं.

जमीन संकट के कारण कई पंचायतों में निर्माण कार्य अधूरा

विभागीय जानकारी के अनुसार, वर्ष 2012 में ही प्रत्येक पंचायत में पंचायत सरकार भवन बनाने का निर्देश जारी किया गया था. लेकिन लंबी अवधि बीतने के बाद भी नोखा प्रखंड की महज छह पंचायतों क्षीखिंडा, धर्मपुरा, चन्की, सोतवा और हथनी आदि में ही भवनों का निर्माण पूरा हो पाया है. वहीं, छतौना, नोनसारी और उत्तरी बराव पंचायत में निर्माण कार्य तकनीकी कारणों से अभी भी प्रगति पर है. शेष बची पंचायतों में उपयुक्त जमीन की अनुपलब्धता या अन्य प्रशासनिक कारणों से भवन नहीं बनने के कारण स्थानीय जनप्रतिनिधियों समेत आम जनता को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

छोटे-छोटे कार्यों के लिए ग्रामीणों को तय करनी पड़ती है लंबी दूरी

पंचायत सरकार भवन के अभाव में नोखा प्रखंड की कई पंचायतों के लोगों को करीब छह से आठ किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता है. उदाहरण के तौर पर प्रखंड मुख्यालय से सोतवा पंचायत की दूरी करीब 5-6 किलोमीटर है. ऐसे में मामूली और छोटे से छोटे काम के लिए भी ग्रामीणों को अपना कीमती समय और पैसा बर्बाद कर मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे स्थानीय लोगों में व्यवस्था के प्रति काफी आक्रोश है. योजना की विडंबना यह भी है कि जिन पंचायतों में करीब पांच वर्ष पूर्व ही पंचायत सरकार भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, वहां भी बदइंतजामी का आलम है. इन भवनों में आरटीपीएस काउंटर तो शुरू हुआ, लेकिन तैनात कर्मी समय पर ड्यूटी पर नहीं आते हैं.

अफसरों का दावा- अनुपस्थित रहने वाले कर्मियों पर कसी जाएगी नकेल

धर्मपुरा पंचायत के ग्रामीण मनोज कुमार, पिंकी देवी, अजय पासवान, राजेश सिंह और हमीद राइन ने बताया कि शुरुआत में कुछ दिनों तक तो काम सुचारू रूप से चला, लेकिन अब कर्मी महज कुछ घंटों के लिए आते हैं और फिर गायब हो जाते हैं, जिसके चलते ग्रामीणों को अंततः प्रखंड मुख्यालय का ही रुख करना पड़ता है. इस संबंध में प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) सुनील कुमार ने बताया कि प्रखंड की चार पंचायतों में पंचायत सरकार भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और तीन पंचायतों में निर्माण कार्य चल रहा है. शेष बची पंचायतों में भी भवन निर्माण की प्रक्रिया जारी है. जहां तक कर्मियों की अनुपस्थिति का सवाल है, तो सरकार के निर्देशानुसार सभी पंचायत सरकार भवनों में बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया गया है, जहां कर्मियों को बायोमेट्रिक के जरिए ही अपनी हाजिरी बनानी होती है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी.

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Published by: Prabhat khabar news desk

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