मॉडल स्कूल में मेधावी 165 छात्रों में से केवल 17 ने लिया दाखिला
SASARAM NEWS.वर्ग आठ की मेधा छात्रवृत्ति के तहत चयनित छात्रों को मॉडल स्कूलों से जोड़ने की सरकारी पहल बिक्रमगंज में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है.
अभिभावकों में जागरूकता की कमी प्रमुख कारण, कई बच्चों का पहले ही दूसरे स्कूलों में हो चुका है नामांकन
मॉडल स्कूल में बेहतर शिक्षा का लक्ष्य, लेकिन संयुक्त कक्षाएं चलाने की मजबूरी
बिक्रमगंज.
वर्ग आठ की मेधा छात्रवृत्ति के तहत चयनित छात्रों को मॉडल स्कूलों से जोड़ने की सरकारी पहल बिक्रमगंज में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है. प्रखंड से चयनित 165 छात्र-छात्राओं में से अब तक मात्र 17 ने ही नामांकन कराया है, जिससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रितेश कुमार ने बताया कि राजकीय सीनियर सेकेंड्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिक्रमगंज को मॉडल स्कूल के रूप में चयनित किया गया है. इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों को एक ही परिसर में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, संसाधन और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्रतिस्पर्धी माहौल में आगे बढ़ सकें.जानकारी के अनुसार कई अभिभावकों ने पहले ही बच्चों का नामांकन अन्य स्कूलों में करा दिया है. कुछ ने दूरी और सुविधा को कारण बताया है, जबकि कुछ का कहना है कि मॉडल स्कूल की विशेषताओं और लाभों की जानकारी पर्याप्त रूप से नहीं मिल पायी.
कम नामांकन से प्रभावित हो रहा लक्ष्य
यह स्थिति स्पष्ट करती है कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता और भरोसे का निर्माण भी जरूरी है. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया, तो योजना का लाभ सीमित रह सकता है.
मॉडल स्कूल में नामांकित बच्चों को मिलेगा बेहतर प्रतिस्पर्धा का माहौल
जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय ने कहा कि विभाग का उद्देश्य चयनित छात्रों को बेहतर और प्रतिस्पर्धी माहौल देना है. उन्होंने स्वीकार किया कि इस दिशा में जागरूकता और विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता है.विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सीमा पांडेय ने बताया कि 165 चयनित छात्रों में से 17 का ही नामांकन हुआ है, जबकि अन्य विद्यालयों से आए छात्रों को मिलाकर कुल नामांकन 128 हो चुका है. फिलहाल सभी नामांकित छात्रों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन मेधा छात्रवृत्ति के छात्रों के लिए अलग कक्षा की योजना संख्या कम होने के कारण लागू नहीं हो पा रही है.