अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित समय से टीम के साथ पहुंचे एसडीएम और डीएसपी
13.41 एकड़ से हटना था अवैध कब्जा, कोर्ट का ऑर्डर आने पर लौटे अधिकारी फोटो -8- अतिक्रमण हटाने पहुंची अनुमंडलीय टीम़ संतोष चंद्रकांत/उमेश शर्मा, बिक्रमगंजपौराणिक व प्राकृतिक महत्व वाले भलुनीधाम के कायाकल्प की दिशा में चल रही प्रशासनिक पहल को मंगलवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब निर्धारित अतिक्रमण हटाओ अभियान पर पटना उच्च न्यायालय के स्टे ऑर्डर के कारण रोक लग गयी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए आगे की रणनीति तय की जायेगी. करीब 31 एकड़ में फैले भलुनीधाम क्षेत्र में जंगल, तालाब, मंदिर और धर्मशालाएं वर्षों से अतिक्रमण की मार झेल रहे हैं. इसके अतिरिक्त लगभग 13.41 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत है.वन विभाग के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की पूरी तैयारी कर ली थी और 28 अप्रैल को भारी पुलिस बल के साथ अभियान चलाया जाना था. निर्धारित समय पर एसडीएम प्रभात कुमार और डीएसपी सिंधु शेखर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन इसी बीच हाइकोर्ट से स्टे ऑर्डर मिलने के बाद अभियान रोकना पड़ा. एसडीएम ने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी. इधर, भलुनीधाम को बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन लाने की प्रक्रिया भी तेज हो गयी है, जिससे इसके विकास की उम्मीद बढ़ी है.
13.41 एकड़ जमीन पर 11 लोगों का कब्जा
अनुमंडल कार्यालय के अभिलेखों के अनुसार, भलुनीधाम के उत्तर स्थित 13.41 एकड़ ‘अनावाद सर्वसाधारण’ भूमि पर कुल 11 लोगों का कब्जा पाया गया है. इस मामले को “सरकार बनाम मधुमंगल सिंह” नाम से दर्ज किया गया है, जिसमें मधुमंगल सिंह को मुख्य पक्षकार बनाया गया है. अभिलेख के मुताबिक मधुमंगल सिंह (स्व. तपेश्वर सिंह) कh 32 डिसमिल जमीन पर स्थायी कब्जा है, जबकि 30 डिसमिल पर अस्थायी कब्जा दर्ज है. अन्य अतिक्रमणकारियों में केदार सिंह, रेंगी सिंह (दोनों स्व. तपेश्वर सिंह), संजय सिंह (स्व गया सिंह), गुप्तेश्वर सिंह (स्व. भलुनी सिंह), हरिनंदन सिंह, राजनंदन सिंह, डिग्री सिंह (तीनों स्व. सुखदेव सिंह), हरेराम सिंह (स्व. श्रीकृष्ण सिंह) और बालेश्वर सिंह (स्व. राधा सिंह) शामिल हैं. इन सभी के कब्जे को अस्थायी श्रेणी में रखा गया है, जो 62.50 डिसमिल से लेकर 125 डिसमिल तक है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भूमि का थाना नंबर 68, खाता संख्या 295 और खेसरा संख्या 1847 है, जिसका कुल रकबा 13.41 एकड़ दर्ज है.
सुनवाई के बाद हटेगा अतिक्रमण
विकास की राह देख रहा भलुनीधाम अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पर फिलहाल न्यायालय की रोक के कारण विराम लग गया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उम्मीद बरकरार है. अधिकारियों के अनुसार सुनवाई के बाद निर्णय आने पर नियमानुसार फिर से अभियान शुरू किया जायेगा. स्थानीय लोगों का मानना है कि भलुनीधाम से अतिक्रमण हटने और इसे धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन लाये जाने से यहां पर्यटन का विकास होगा. इससे न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे. भलुनीधाम का भविष्य अब कोर्ट के फैसले पर टिका है, लेकिन लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह स्थल एक विकसित धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा.
