साढ़े तीन वर्षों में भी टीबी मुक्त नहीं हो सकी जिले की एक भी पंचायत

SASARAM NEWS. जिले में टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. सरकारी तंत्र के साथ सहयोगी संस्थाओं और निजी क्लीनिकों के सहयोग से टीबी मरीजों की पहचान कर उनका इलाज भी कराया जा रहा है.

जिले के हर प्रखंड की दो पंचायतों का स्वास्थ्य विभाग ने किया था चयन

3935 टीबी के एक्टीव मरीजों का चल रहा है इलाज

सासाराम सदर.

जिले में टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. सरकारी तंत्र के साथ सहयोगी संस्थाओं और निजी क्लीनिकों के सहयोग से टीबी मरीजों की पहचान कर उनका इलाज भी कराया जा रहा है. विभाग का मकसद टीबी संक्रमित सभी मरीजों का इलाज कर संक्रमण की चेन को तोड़ना है.इसको लेकर केंद्रीय यक्ष्मा विभाग, भारत सरकार द्वारा यक्ष्मा के मरीजों के समुचित उपचार के लिए निजी चिकित्सकों के साथ कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती हैं. टीबी बीमारी की चेन को तोड़ने के लिए पंचायत स्तर पर कार्यक्रम शुरू किया गया था. इसके तहत टीबी मुक्त पंचायत बनाने के उद्देश्य से साढ़े तीन वर्ष पूर्व जिले के 38 पंचायतों का चयन किया गया था.चयनित पंचायतों में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचकर पंचायत प्रतिनिधियों व आमजनों के साथ बैठक कर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया गया था. इस कार्यक्रम के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी जिले का एक भी पंचायत अब तक टीबी मुक्त नहीं हो सका है.गांव स्तर तक टीबी मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 15 फरवरी 2026 को जिले समेत ग्रामीण क्षेत्रों के निजी चिकित्सकों के साथ बैठक की थी. उस समय गांव स्तर पर किये गये स्क्रीनिंग में 3100 मरीज चिन्हित किये गये थे, जो अब बढ़कर 3935 हो गये हैं. इनका इलाज सदर अस्पताल के अलावा संबंधित प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है.

जनप्रतिनिधियों का भी लिया जा रहा सहयोग

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ मणिराज रंजन ने बताया कि टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में जिला स्वास्थ्य समिति बेहतर कार्य कर रही है. पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों के सहयोग से मरीजों की पहचान कर उनका इलाज किया जा रहा है. हालांकि अब तक एक भी पंचायत टीबी मुक्त नहीं हो सका है. इसके लिए विभाग ग्रामीण स्तर पर लगातार स्क्रीनिंग कर मरीजों की पहचान कर रहा है.

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Published by: Vikash kumar

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