sasaram news : नगर परिषद बिक्रमगंज की राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रही खींचतान के बीच आखिरकार सामान्य बोर्ड की बैठक बुला ली गई है. खास बात यह है कि 29 मई को वार्ड पार्षदों द्वारा सौंपे गए मांगपत्र के अधिकांश मुद्दों को प्रशासन ने पांच जून को प्रस्तावित बैठक के एजेंडे में शामिल कर लिया है. इससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि पार्षदों के बढ़ते दबाव के बाद नगर प्रशासन को बैठक बुलाने और विकास कार्यों पर चर्चा करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
15 पार्षदों ने दिया था सात दिन का अल्टीमेटम
विदित हो कि 29 मई को सशक्त स्थायी समिति के निर्विरोध निर्वाचन के बाद 15 वार्ड पार्षदों ने हस्ताक्षरयुक्त मांगपत्र सभापति और कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपा था. पार्षदों का आरोप था कि कई महीनों से बोर्ड की बैठक नहीं होने के कारण विकास कार्य ठप पड़े हैं.
पार्षदों ने सात दिनों के भीतर बैठक बुलाने की मांग करते हुए मानदेय कर्मियों के वेतन वृद्धि, नल-जल योजना की मरम्मत, नई स्ट्रीट लाइट की खरीद, टेस्ट लैब की मरम्मत तथा सफाई व्यवस्था के लिए एनजीओ के माध्यम से टेंडर सहित आठ प्रमुख प्रस्तावों को एजेंडे में शामिल करने की मांग की थी.
सात दिन बाद खुली प्रशासन की नींद
मांगपत्र सौंपे जाने के ठीक सात दिन बाद, दो जून को नगर परिषद कार्यालय की ओर से पत्र जारी कर पांच जून को अपराह्न तीन बजे सामान्य बोर्ड बैठक बुलाने की सूचना दी गई. इसके बाद नगर परिषद की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है.
विवादित मुद्दों पर हो सकता है हंगामा
हालांकि, पार्षदों द्वारा उठाए गए जेम पोर्टल से की गई खरीदारी की उच्चस्तरीय जांच तथा नाली-गली निर्माण कार्यों के भुगतान से जुड़े विवादित मामलों को बैठक के मुख्य एजेंडे में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि बोर्ड बैठक के दौरान पार्षद इन मुद्दों पर मुखर रुख अपनाते हुए जोरदार बहस या हंगामा कर सकते हैं.
अब देखना यह होगा कि यह बैठक शहर के विकास कार्यों को नई दिशा देने में सफल होती है या फिर केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है.
Also Read: जाम का झाम : आरा फोरलेन पर सुबह चार बजे से ही जाम, गलत दिशा में वाहन चलने से खतरा
