Sasaram news : (आमोद सिंह) सासाराम नगर निगम में अंदरूनी सियासत और खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई है। नगर आयुक्त कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी देने वाले एक पत्र को लेकर पार्षदों के बीच गुटबाजी तेज हो गई है. कई वार्ड पार्षदों ने खुद को इस तालाबंदी के अल्टीमेटम से पूरी तरह अलग कर लिया है. साथ ही, पत्र जारी करने वालों पर बिना सहमति के उनका नाम घसीटने का गंभीर आरोप लगाया है.
मेयर के सामने पार्षदों ने दर्ज कराई आपत्ति
दरअसल, सोमवार को मेयर की अध्यक्षता में सशक्त स्थायी समिति की बैठक चल रही थी. इसी दौरान वार्ड संख्या-11, 42, 43, 46 और 47 के पार्षद मेयर के पास पहुंचे और अपनी बात रखी. पार्षदों ने साफ शब्दों में कहा, “हमारे वार्ड की सभी योजनाओं की निविदा (टेंडर) समय पर हो चुकी है. हमारे यहां कोई काम नहीं अटका है. हम इस तालाबंदी की चेतावनी में शामिल नहीं हैं. पत्र में बेवजह हमारा नाम शामिल किया गया है.
क्या है पूरा मामला
हाल ही में डिप्टी मेयर सत्यवंती देवी के नेतृत्व में एक पत्र जारी कर नगर आयुक्त को अल्टीमेटम दिया गया था. इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि नगर आयुक्त मनमाने ढंग से कई वार्डों की योजनाओं को लटकाए हुए हैं. पत्र में चेतावनी दी गई थी कि अगर 31 मई तक इन योजनाओं की निविदा जारी नहीं की गई, तो पार्षद नगर आयुक्त के कार्यालय में तालाबंदी करेंगे.
डिप्टी मेयर के बयानों में विरोधाभास: “सादे कागज पर हस्ताक्षर” का दावा
पार्षदों द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, जब बैठक में उपस्थित डिप्टी मेयर से इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया। विज्ञप्ति के मुताबिक, डिप्टी मेयर ने कहा कि उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए थे और उन्हें इस पत्र की पूरी जानकारी नहीं थी. बाद में डिप्टी मेयर सत्यवंती देवी से सीधे बात की गई, तो उन्होंने अपने रुख में बदलाव करते हुए कहा कि यह पत्र पूरी तरह से उनके संज्ञान में ही लिखा गया है.
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