Rohtas News : रोहतास जिला के बिक्रमगंज मंडल उपकारा में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल की गयी है. कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आयोजित चार दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में 31 बंदियों को वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक सिखाई गयी. प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को कौशल देकर भविष्य में स्वरोजगार से जोड़ना है.
वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन की दी गयी जानकारी
15 से 18 जुलाई 2026 तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय "वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन, तकनीक एवं विपणन" रखा गया था. उपकारा अधीक्षक मो. तारीक अनवर द्वारा चयनित बंदियों ने इसमें भाग लिया.
वैज्ञानिकों ने सिखाई जैविक खाद बनाने की तकनीक
कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. रामाकांत सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को वर्मी कम्पोस्ट निर्माण की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी. उन्होंने केंचुओं के चयन, बेड तैयार करने, कच्चे पदार्थों के उपयोग, नमी और तापमान नियंत्रण, खाद तैयार होने की पहचान, पैकिंग और बिक्री की प्रक्रिया समझाई.
बंदियों ने खुद तैयार किया वर्मी कम्पोस्ट बेड
प्रशिक्षण में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गयी, बल्कि बंदियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया. प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में स्वयं वर्मी कम्पोस्ट बेड तैयार किया और जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया को समझा.
31 बंदियों को मिला प्रमाण-पत्र
प्रशिक्षण के समापन समारोह में सभी 31 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया. कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक आर.के. जलज ने कहा कि इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कम लागत में रोजगार का बेहतर माध्यम
उपकारा अधीक्षक मो. तारीक अनवर ने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन कम लागत वाला, पर्यावरण अनुकूल और रोजगार देने वाला कार्य है. उन्होंने बंदियों से प्रशिक्षण का लाभ उठाकर भविष्य में सम्मानजनक आजीविका अपनाने की अपील की.
