मांझी. प्रखंड में लगातार हुई मूसलाधार बारिश के चलते किसानों के खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है, जिससे रबी फसलों की बुवाई पर गंभीर संकट मंडरा रहा है. मसूर, खेसारी, सरसों, और मटर जैसी दलहनी फसलों की बुवाई आमतौर पर 15 अक्तूबर से शुरू हो जाती है, लेकिन खेतों में पानी जमा होने से इस साल समय पर बुआई होना मुश्किल लग रहा है. मांझी के किसान मनोज सिंह, संजय यादव, अजय यादव, रामपुकार मांझी, अनवर अली, और सुनील पांडेय ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि लगातार दूसरे साल बुवाई का संकट है, पर न तो किसी राजनीतिक दल को और न ही नेताओं को इसकी चिंता है. किसानों में निराशा व्याप्त है और वे कह रहे हैं, पहले रोटी देखें या चुनाव.
बुआई में देरी से पाला का खतरा बढ़ा
खेतों में दलहनी फसलों की बुवाई का इंतजार कर रहे टाल के किसान जन्नत हुसैन, अकलू यादव, और मुन्ना साह ने बताया कि इससे पहले धान की फसल को भी बारिश ने बर्बाद कर दिया है, जिससे किसान पहले से ही आर्थिक संकट में हैं। अब रबी की बुआई में देरी से उनकी बेचैनी और बढ़ गयी है. किसानों का कहना है कि बुआई जितनी देर से शुरू होगी, फसलों को ठंड से पाला मारने का डर उतना ही ज़्यादा होगा. यदि समय पर बुआई नहीं हुई, तो फसल उत्पादन में भारी कमी आयेगी, जिससे किसानों के समक्ष भुखमरी जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है.प्याज उत्पादक किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश के पानी से खेतों में जलजमाव के कारण प्याज उत्पादक किसान भी बेचैन हैं. प्रखंड के कई पंचायतों में किसान बड़े पैमाने पर प्याज की खेती करते हैं. आमतौर पर, अक्तूबर में किसान खेत की जुताई करके प्याज के बीज का नर्सरी तैयार करते हैं. प्याज उत्पादक किसान पप्पू महतो, रामनरेश यादव, और अजय ने बताया कि नवंबर की शुरुआत में ही प्याज के बिचड़े खेतों में गिराने पड़ते हैं, लेकिन बरसाती पानी सूखने के बाद भी खेतों में ज्यादा नमी रहने से बिचड़े गिराना संभव नहीं होगा. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी प्याज के बिचड़े गिराने में देरी हुई थी और बाद में बारिश की मार ने उनकी कमर तोड़ दी थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
