सोनपुर. पुरानी गंडक पुल पर रविवार को लगा भीषण जाम प्रशासनिक दावों और तैयारियों की पोल खोलने के लिए काफी था. पुल के दोनों ओर वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारों के कारण घंटों तक आवाजाही ठप रही. इस अव्यवस्था के बीच एक एंबुलेंस भी सायरन बजाते हुए फंसी रही, जिसमें सवार मरीज की जान सांसत में अटकी रही, लेकिन भीड़ और वाहनों के दबाव के आगे प्रशासन बेबस और नदारद दिखा.
कागजों पर खत्म, लेकिन जमीन पर जारी है मेला
जाम का सबसे बड़ा कारण मेला समापन की घोषणा के बावजूद मेला क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे झूला और खेल-तमाशे बताये जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने कागजों पर मेला समापन की घोषणा तो कर दी है, लेकिन जमीन पर मनोरंजन के साधन और दुकानें आज भी सजी हुई हैं. रविवार होने के कारण भारी संख्या में भीड़ उमड़ी, जिससे निपटने के लिए मौके पर न तो ट्रैफिक पुलिस तैनात थी और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था.एंबुलेंस को भी नहीं मिला रास्ता
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भारी वाहनों और निजी कारों की अनियंत्रित आवाजाही ने पुल को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था। आपात वाहनों के लिए कोई अलग ग्रीन कॉरिडोर या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं होने के कारण एंबुलेंस घंटों रेंगती रही. मरीज के परिजनों के चेहरे पर पसरी बेबसी प्रशासनिक उदासीनता की गवाह बनी रही. वहीं स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि मेला समाप्त हो चुका है, तो अवैध रूप से झूलों और मनोरंजन के संसाधनों को क्यों नहीं हटाया गया? लोगों का मानना है कि इन अस्थायी ढांचों के कारण ही भीड़ बेकाबू हो रही है और यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है. यह स्थिति किसी बड़ी अप्रिय घटना को भी न्योता दे सकती है.कठोर कार्रवाई की मांग
घटना से आक्रोशित नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से संचालित झूलों और दुकानों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाये. इसके अलावा पुरानी गंडक पुल पर स्थायी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो. भविष्य में मेला अवधि के बाद ऐसी लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
